खुल गया करतारपुर कॉरिडोर, 20 नवंबर के बाद गुरुद्वारे के दर्शन करेंगे सीएम चन्नी

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सुबह 11 बजे अपनी पूरी कैबिनेट के साथ माथा टेकने के लिए गुरुद्वारा जाएंगे. कल भारत से 28 सिख करतारपुर साहिब पहुंचे थे.

न्यूज जगंल डेस्क, कानपुर : करतारपुर कॉरिडोर खुल गया है. भारत से 28 सिखों का पहला जत्था बुधवार को वीजा-मुक्त गलियारे का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में पवित्र गुरुद्वारा करतारपुर साहिब पहुंचा. इनमें महिलाएं भी शामिल थीं. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपनी पूरी कैबिनेट के साथ माथा टेकने के लिए 20 नवंबर के बाद गुरुद्वारा जाएंगे. यात्रा पर जाने वालों को कोरोना के दोनो डोज़ लगे होने चाहिए या फिर RTPCR टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य होगी.

कल 28 लोगों ने किए थे दरबार पुर साहिब गुरुद्वारे के दर्शन

भारत सरकार की ओर से गलियारा फिर से खोले जाने के बाद पहले दिन (बुधवार) महिलाओं सहित भारत से 28 सिख करतारपुर साहिब पहुंचे. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थानों की देखभाल की जिम्मेदारी इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) पर है. इससे पहले मार्च 2020 में कोविड-19 का प्रकोप शुरू होने के बाद तीर्थयात्रा को स्थगित कर दिया गया था. इसी तरह 2500 से अधिक भारतीय सिख वाघा सीमा पार से पाकिस्तान पहुंचे. ये सभी श्रद्धालु सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की जयंती पर आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में भाग लेंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा- अच्छा घटनाक्रम

तीर्थयात्रियों ने गुरुद्वारे में कई घंटे बिताए और धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद वापस अपने देश लौट गए. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने करतारपुर गलियारे को फिर से खोलने को “अच्छा घटनाक्रम” करार दिया. कुरैशी ने इस्लामाबाद में संसद के बाहर मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा, “मैं पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तान के लोगों की ओर से सिख तीर्थयात्रियों का स्वागत करता हूं. सिख तीर्थयात्री आज से इस गलियारे से अपने पवित्र स्थलों के दर्शन करने आएंगे.”

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करीब 2,500 से अधिक भारतीय पैदल वाघा सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंचे. एक अधिकारी ने कहा, “यात्रियों की कतार बुधवार सुबह छह बजे से लगी हुई थी. आव्रजन और टीके और कोविड संबंधी अन्य परीक्षणों के कारण प्रक्रिया धीमा थी जिससे तीर्थयात्रियों को काफी असुविधा हुई.” उन्होंने कहा कि पिछले चलन के विपरीत, इस बार श्रद्धालु ट्रेन के बजाय पैदल ही यहां आएंगे. “इस बार वे पैदल आए और इससे पूरी आव्रजन प्रक्रिया लंबी हो गई.”

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