‘नदी का मर्सिया तो पानी हो गाएगा’…

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News jungal desk: कानपुर कवि केशव तिवारी का कविता संग्रह ‘नदी का मर्सिया तो पानी हो जाएगा’ पर परिचर्चा समयानुकूल रही। इसकी प्रासंगिकता सामाजिक चर्चा का विषय है। जनवादी लेखक संघ कानपुर लगातार साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करता रहता है । इसी सिलसिले को जारी रखते हुए एक काव्यमयी शाम का आयोजन पत्रकारपुरम में रोमी अड्डा पर किया गया।

इस आयोजन में जाने माने कवि केशव तिवारी के कविता  संग्रह ‘नदी का मर्सिया तो पानी ही गाएगा’ चर्चा और काव्य पाठ का आयोजन किया गया।
‘तो काहे का मैं’  काव्य संग्रह  से चर्चा में आए कवि केशव तिवारी जिला बांदा से संबंध रखते हैं। उनके नए काव्य संग्रह नदी का मर्सिया तो पानी ही गाएगा हाल में प्रकाशित हुआ है। इसी संग्रह पर  युवा कवि अविनाश मिश्र और प्रसिद्ध कवि – आलोचक पंकज चतुर्वेदी ने अपना वक्तव्य दिया। जनवादी लेखक संघ की सचिव अनीता मिश्रा ने उपस्थित श्रोताओं का स्वागत करते हुए रोमी अड्डा जैसे क्रिएटिव जगह के विचार के लिए कबीर अरोड़ा का आभार जताया ।कार्यक्रम का संचालन रमा शंकर सिंह ने किया। रमा शंकर सिंह ने कहा कि नदी पर कविताएं कम लिखी गई हैं। लोगो को उस तरह का जुड़ाव नहीं महसूस होता है।
लेखकीय वक्तव्य केशव तिवारी ने अंत में दिया।धन्यवाद  ज्ञापन लेखक /कवि / रंगकर्मी राजेश अरोड़ा ने किया।कार्यक्रम के आरंभ में दिल्ली से आए अविनाश मिश्र ने अपने वक्तव्य में केशव तिवारी की रचना प्रक्रिया के बारे में बताया । उनकी कविताओं में एक तरह का अलगाव है वो उन विषयों से करीब हैं जो उन्होंने अपने संग्रह में उठाया। उनकी कविताओं के केंद्र में पर्यावरण की चिंता दिखाई देती है। उनकी कविताएं अपनी जमीन से कटी हुई नही हैं।


किताब पर अपना वक्तव्य देते हुए  कवि पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि यह एक बहुत अहम कविता संग्रह है इसे अवश्य पढ़ा जाना चाहिए। केशव जी एक सहज कवि हैं। ऐसे कवि हिंदी में कम हैं। उनकी कविता बौद्धिक व्यायाम की कविता नही है।
कार्यक्रम के अंत में केशव जी ने अपने जीवन और कविता से जुड़े अनुभव के विषय में बताया।
कार्यक्रम में अनेक लेखक , बुद्धिजीवी , रंग कर्मी उपस्थित रहे। प्रमुख लोगो में  सईद नकवी , राजिया नकवी , भावना मिश्रा , मौली सेठविनोद श्रीवासत्व , संजीव मिश्रा , देव कबीरबी पी सिंह , इतिहास विज्ञ अनूप शुक्ल मौजूद रहे। अंत में कबीर ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

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