BJP ने खेला दलित वोट बैंक के लिए नया दांव

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न्यूज जगंल डेस्क: कानपुर उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में महज 4 माह बचे हैं। सभी विपक्षी पार्टियां जनता को लुभाने के लिए हर दांव लगा रही हैं। लेकिन सबसे ज्यादा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी फ्रंटफुट पर खेल रही हैं। यह बात सत्ताधारी पार्टी भाजपा को अखरने लगी है। यही वजह है कि भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव कर दिया है। अब भाजपा दलित बस्तियों में छोटी-छोटी बैठकें करेंगी। उन्हें पार्टी की नीतियों को बताया जाएगा।

यूपी में भाजपा और कांग्रेस में दलित वोट बैंक को लेकर अच्छी-खासी लड़ाई है। माना जाता है कि 2017 के विधानसभा इलेक्शन में भाजपा को जहां 24 फीसदी दलित वोट मिला था, वहीं कांग्रेस को 18 फीसदी वोट बैंक मिला था। ऐसे में भाजपा दलित वोट बैंक को बढ़ाने के लिए तेजी से सक्रिय हो गई है।

हर विधानसभा में टोली बैठक
अभी तक भाजपा प्रदेश लेवल पर सामाजिक बैठकें कर रही है। इसके बाद अब भाजपा सभी जिले और प्रत्येक विधानसभा व वार्ड स्तर पर टोली, सामाजिक व छोटी-छोटी बैठकें करेगी। इसमें बस्तियों और दलित के बीच में होने वाली छोटी-छोटी बैठकों में बड़े नेता भी शामिल होने के लिए आएंगे।

इन बैठकों में भाजपा के सांसद, मंत्री, विधायक और बड़े पदाधिकारी भी शामिल होंगे। मामले में कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी मोहित पांडेय ने बताया कि सभी वर्गों का सम्मेलन भाजपा प्रदेश स्तर पर कर रही है। जिलों में भी सभी वर्गों के सम्मेलन किए जाएंगे।

हर महीने 15 कार्यक्रम
भाजपा पार्टी सूत्रों के मुताबिक एससी-एसटी बाहुल्य सीटों पर बड़े दलित नेताओं को उतारने की तैयारी है। ये विधानसभाओं में छोटे-छोटे कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। कानपुर में भाजपा की 3 सीट सीसामऊ, कैंट और आर्य नगर में दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका अदा करता है। ऐसे में पूर्व डीजीपी व एससी-एसटी आयोग के चेयरमैन बृजलाल को जिम्मेदारी दी हैं। ये शुक्रवार से कानपुर में 2 दिन रहेंगे और कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वहीं कानपुर में सीसामऊ सीट पर भाजपा दलित कैंडिडेट उतारने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

इन बड़े नेताओं पर जिम्मेदारी
एससी-एसटी वर्ग को रिझाने के लिए भाजपा ने इस बार नई रणनीति बनाई है। जिसके तहत जन आशीर्वाद यात्रा, एससी-एसटी वर्ग सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा भाजपा पूर्व राज्यपाल व प्रदेश उपाध्यक्ष बेबी रानी मौर्य जाटव के भी पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

कानपुर में 5 दिन पहले ही इनका कार्यक्रम किया गया। इसके अलावा रमापति शास्त्री, सुरेश पासी, कौशांबी सांसद विनोद कुमार सोनकर भी उतारा गया है।

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जाटव की भूमिका अहम

भाजपा भले ही जातिगत चुनाव लड़ने का दावा करती है। लेकिन हर वर्ग को साधने के लिए पूरी रणनीति के साथ काम किया जा रहा है। 2017 विधानसभा चुनाव में 403 सीटों में 86 सीटें आरक्षित थीं। इनमें से 76 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। बसपा के खाते में 2 महज सीट ही आईं थीं। यूपी में ओबीसी के बाद 20-21 फीसदी संख्या दलितों की है। इसमें भी बड़ी संख्या में जाटव है जो 54 फीसदी हैं।

यूपी में प्रमुख दलित उपजाति

उपजातिप्रतिशत
जाटव56
पासी16
धोबी, कोरी और वाल्मिकी15
गोंड, धानुक और खटीक5

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