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खेत में अच्छी उपज न होने पर किसान इस तरह करा सकते है मिट्टी की जांच, जानें क्या है पूरी प्रक्रिया

कृषि अधिकारी मऊ सोम प्रकाश गुप्ता ने इस संबंध में बात करते हुए बताया कि यदि फसल की उपज अच्छी नहीं होती तो हमे सबसे पहले मृदा परीक्षण कर लेना चाहिए. यह एक तरह का मिट्टी का एक्सरे होता है,

News jungal desk : भारत एक कृषि प्रधान देश है । और यहां की लगभग 70 फ़ीसदी आबादी कृषि उपज पर अपना जीवन यापन करती है । ऐसे में यदि खेतों में उपज कम होती है तो किसान पर आर्थिक बोझ आ जाता है । खेतों के उपज कम होने के अनेक कारण होते हैं । और जिनमें से एक प्रमुख कारण है मिट्टी की खराब गुणवत्ता.फसलों की उपज को बढ़ाने के लिए मिट्टी में खनिज पदार्थों की उचित मात्रा होनी आवश्यक है । और खनिजों की उचित मात्रा तथा मिट्टी की गुणवत्ता को परखने के लिए प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच कराना अति आवश्यक होता है ।

कृषि अधिकारी मऊ सोम प्रकाश गुप्ता ने इस संबंध में बात करते हुए बताया कि यदि फसल की उपज अच्छी नहीं होती तो हमें सबसे पहले मृदा परीक्षण कर लेना चाहिए । यह एक तरह का मिट्टी का एक्सरे होता है, जिससे ये पता चलता है कि मिट्टी का रासायनिक विन्यास क्या है? और मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी या अधिकता है.कृषि अधिकारी के अनुसार कभी कभी अनभिज्ञता की स्थिति में किसान समझ नहीं पाता कि खेतों में किस पोषक तत्व की कितनी मात्रा की जरूरत है । और जिस पोषक तत्व की अधिकता होती उसी को बार बार खेतों में डालता चला जाता है । इससे खेतों के उपजाऊपन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.खेतों में पोषक तत्वों की मात्रा को जानने के लिए मृदा परीक्षण अति आवश्यक है ।

ऐसे इकट्ठा करें खेत से मिट्टी
मृदा परीक्षण के लिए कृषि अधिकारी ने बताया कि खेत के चारों कोने से 1 मीटर छोड़कर खेत में 5 जगह से मिट्टी लेनी चाहिए.यह मिट्टी खेत के चारों तरफ और खेत के बीचों- बीच लगभग 6 इंच का गड्ढा खोदकर ली जानी चाहिए । उसके बाद इस मिट्टी को तबतक मिलना चाहिए, जब तक कि मिट्टी आधा किलो न हो जाए.इसके बाद इस मिट्टी को प्रयोगशाला में परिक्षण के लिए भेजा जाना चाहिए.कृषि अधिकारी ने बताया कि हमारे यहां 29 रुपए मृदा परीक्षण और 102 रुपए में सभी पोषक तत्वों की जांच की जाती है.मिट्टी के संकलन के लिए हर न्यायपंचायत में कर्मचारी नियुक्त है.मिट्टी की संरचना को जानने के बाद हम उस मिट्टी में उचित पोषक तत्व डाल कर उसकी गुणवत्ता को बढ़ा सकते तथा फसलों के अच्छे उत्पादन को प्राप्त कर सकते हैं ।

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