Temple Wearable: फिटनेस और हेल्थ ट्रैकिंग की दुनिया में अब एक नया नाम चर्चा में है। Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल की कंपनी Temple ने हार्ट रेट मॉनिटरिंग के मामले में Apple Watch, Garmin और WHOOP जैसे बड़े ब्रांड्स को चुनौती दी है। कंपनी का दावा है कि उसकी नई वियरेबल तकनीक हार्ट रेट को ट्रैक करने में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। Temple की ओर से सामने आई स्टडी के बाद फिटनेस टेक्नोलॉजी बाजार में इस डिवाइस को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है Temple Wearable?
Temple एक नई तरह की वियरेबल डिवाइस है, जिसे शरीर की गतिविधियों और स्वास्थ्य से जुड़े संकेतों को ट्रैक करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसका फोकस खासतौर पर हार्ट रेट मॉनिटरिंग पर है।
इस डिवाइस को पारंपरिक स्मार्टवॉच से अलग तरीके से इस्तेमाल करने की अवधारणा के साथ पेश किया गया है। कंपनी का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ-साथ एक्सरसाइज के दौरान भी शरीर से जुड़े आंकड़े दर्ज कर सके।
Apple Watch और Garmin को क्यों दे रही चुनौती?
अभी तक फिटनेस ट्रैकिंग के बाजार में Apple Watch, Garmin और WHOOP जैसे ब्रांड्स की मजबूत पकड़ रही है। ये डिवाइस हार्ट रेट, कैलोरी बर्न, नींद और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियों की निगरानी करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
Temple का दावा है कि उसकी तकनीक हार्ट रेट मापने के मामले में इन लोकप्रिय डिवाइसों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे सकती है। कंपनी की स्टडी में इसी तकनीक की तुलना दूसरे वियरेबल डिवाइसों से की गई है।
स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
Temple की स्टडी में 43 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया था। इनकी उम्र 20 से 35 साल के बीच थी। परीक्षण के दौरान Temple की तुलना पांच प्रमुख फिटनेस डिवाइस से की गई।
कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्ट रेट मापने में औसत गलती (Mean Absolute Error) के आंकड़े इस प्रकार रहे:
डिवाइस | औसत गलती (BPM) |
|---|---|
Temple | 1.18 |
Apple Watch Series 12 | 1.94 |
Fitbit Air | 2.96 |
WHOOP MG | 3.14 |
Garmin Forerunner 970 | 3.18 |
Oura Ring 5 | 5.21 |
इन आंकड़ों के अनुसार Temple ने सबसे कम एरर दर्ज किया। खासतौर पर तेज एक्सरसाइज के दौरान भी इसके नतीजे बेहतर रहे।
कैसे काम करता है Temple Wearable?
Temple को माथे के किनारे यानी कनपटी के पास लगाया जाता है। इसमें एडहेसिव आधारित डिजाइन और सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का कहना है कि इस जगह पर डिवाइस लगाने से तेज एक्सरसाइज के दौरान भी सेंसर का संपर्क बना रहता है और हार्ट रेट की रीडिंग बेहतर मिल सकती है।
क्या स्टडी के नतीजे पूरी तरह साबित हैं?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ये नतीजे Temple की अपनी कंपनी की ओर से कराए गए परीक्षण पर आधारित हैं। स्टडी को कंपनी ने ही फंड किया, संचालित किया और उसका विश्लेषण किया। परीक्षण एक ही लैब में ट्रेडमिल पर किया गया था। इसमें आउटडोर रनिंग, साइकिलिंग और वेट ट्रेनिंग जैसी गतिविधियों को शामिल नहीं किया गया।
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