Murasu Cyclone: 7 दिनों में आए दो शक्तिशाली तूफान, आखिर एक चक्रवात बनने में कितना समय लगता है? जानें पूरी प्रक्रिया


 पिछले कुछ दिनों में लगातार दो शक्तिशाली तूफानों के विकसित होने से मौसम वैज्ञानिकों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। महज सात दिनों के भीतर दो चक्रवाती तूफानों की स्थिति बनने से समुद्री मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी बीच मुरासु साइक्लोन (Murasu Cyclone) को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर समुद्र में एक चक्रवात बनने में कितना समय लगता है और इसके पीछे कौन-सी प्राकृतिक परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं?

दरअसल, चक्रवात का निर्माण एक जटिल प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके लिए समुद्र का गर्म होना, वातावरण में नमी की पर्याप्त मात्रा, हवा का कम दबाव और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियां जरूरी होती हैं। जब ये सभी परिस्थितियां एक साथ अनुकूल हो जाती हैं, तो समुद्र के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे शक्तिशाली तूफान का रूप ले सकता है।

समुद्र का गर्म पानी चक्रवात बनने में निभाता है अहम भूमिका

चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का तापमान सामान्यतः 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना जरूरी माना जाता है। गर्म समुद्री पानी से बड़ी मात्रा में वाष्पीकरण होता है। इससे वातावरण में नमी बढ़ती है। जब यह नम हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है, तो बादलों का निर्माण होता है और गर्मी निकलती है। यही ऊर्जा तूफान को और शक्तिशाली बनाने में मदद करती है।

कैसे बनता है एक शक्तिशाली साइक्लोन?

चक्रवात बनने की प्रक्रिया आमतौर पर कई चरणों में पूरी होती है।

  1. कम दबाव का क्षेत्र: समुद्र के ऊपर हवा का दबाव कम होने लगता है और आसपास की हवाएं उस क्षेत्र की ओर बढ़ती हैं।

  2. हवा का ऊपर उठना: गर्म और नम हवा ऊपर उठती है, जिससे बादलों का बड़ा समूह बनता है।

  3. हवाओं का घूमना: पृथ्वी के घूर्णन के कारण हवाएं घूमने लगती हैं और सिस्टम में चक्रवाती गतिविधि विकसित होती है।

  4. तूफान का मजबूत होना: अनुकूल परिस्थितियां बनी रहने पर हवा की गति बढ़ती है और सिस्टम एक शक्तिशाली चक्रवात में बदल सकता है।

कितने दिनों में बनता है चक्रवात?

किसी चक्रवात के बनने का समय निश्चित नहीं होता। अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर यह प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी हो सकती है। कई बार कम दबाव का क्षेत्र तेजी से विकसित होकर 2 से 5 दिनों में चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है, जबकि कुछ सिस्टम को विकसित होने में अधिक समय भी लगता है।

क्या अल-नीनो का भी पड़ता है असर?

अल-नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला बदलाव है, जो वैश्विक मौसम प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में अलग हो सकता है। हालांकि, किसी चक्रवात के बनने का सीधा कारण केवल अल-नीनो नहीं होता। समुद्र का तापमान, नमी, हवा की दिशा और वायुमंडलीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस तरह समुद्र में अनुकूल परिस्थितियां बनने पर कुछ ही दिनों में एक सामान्य कम दबाव का क्षेत्र शक्तिशाली चक्रवात में बदल सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ