Diwali 2026: देश के अलग-अलग राज्यों में दिवाली मनाने के हैं अनोखे तरीके, जानें अयोध्या, वाराणसी और कोलकाता की खास परंपराएं


 

Diwali 2026: भारत में दिवाली का त्योहार केवल दीप जलाने और आतिशबाजी तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग राज्यों में इस पर्व को मनाने के तरीके, धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं अलग-अलग हैं। अयोध्या में भव्य दीपोत्सव, वाराणसी में गंगा घाटों की आरती और कोलकाता में मां काली की पूजा इस त्योहार को खास बनाती है।

भारत में दिवाली सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इसे रोशनी, खुशियों, समृद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद जब अयोध्या लौटे थे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा के चलते दिवाली पर घरों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। हालांकि, भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को मनाने की परंपराएं काफी अलग हैं।

अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दिवाली का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि और उनकी अयोध्या वापसी से जोड़कर देखा जाता है। यहां दिवाली के अवसर पर भव्य दीपोत्सव आयोजित किया जाता है। सरयू नदी के घाटों पर लाखों दीप जलाए जाते हैं। मंदिरों और प्रमुख मार्गों को आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है। इस दौरान रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष पूजा-अर्चना भी आयोजित होती है।

वाराणसी में गंगा घाटों की रौनक

वाराणसी में दिवाली के दौरान धार्मिक उत्साह देखने लायक होता है। यहां गंगा घाटों पर दीप जलाए जाते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा होती है। गंगा आरती के दौरान घाटों का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। इसके अलावा, वाराणसी में देव दीपावली भी विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस अवसर पर गंगा के घाट लाखों दीपों से जगमगा उठते हैं।

कोलकाता में मां काली की पूजा

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दिवाली का त्योहार काली पूजा के रूप में विशेष महत्व रखता है। इस दिन मां काली की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और रातभर पूजा-अर्चना होती है। पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्त मां काली से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

गुजरात में लक्ष्मी पूजा की परंपरा

गुजरात में दिवाली का त्योहार नए साल के स्वागत से भी जुड़ा हुआ है। यहां लोग घरों और दुकानों की साफ-सफाई करके उन्हें सजाते हैं। दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। व्यापारी वर्ग के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। कई जगहों पर नए बहीखाते शुरू करने की परंपरा भी है।

महाराष्ट्र में नरक चतुर्दशी का महत्व

महाराष्ट्र में दिवाली का उत्सव कई दिनों तक चलता है। यहां नरक चतुर्दशी पर सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं। इसके अलावा, लक्ष्मी पूजा और भाई दूज भी उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।

दक्षिण भारत में अलग अंदाज

तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में दिवाली का संबंध भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से भी जोड़ा जाता है। यहां नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर तेल स्नान करने और नए कपड़े पहनने की परंपरा है।

इस तरह भारत के अलग-अलग राज्यों में दिवाली मनाने के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन त्योहार का मूल संदेश एक ही है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर उम्मीद की जीत का प्रतीक है। यही विविधता भारतीय संस्कृति को खास बनाती है।

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