दिल्ली-NCR में जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंचता है, तो हवा की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। इस स्तर पर हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर के भीतर पहुंच सकते हैं। खासकर PM2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों की गहराई तक जाकर खून में भी प्रवेश कर सकते हैं। इसका असर केवल सांस लेने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से पहले से मौजूद बीमारियां बढ़ सकती हैं और स्वस्थ लोगों को भी परेशानी हो सकती है। आइए जानते हैं शरीर के किन पांच अंगों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
1. फेफड़े: सांस लेने में बढ़ सकती है परेशानी
प्रदूषित हवा का सबसे सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। धूल, धुआं और बारीक कण सांस की नलियों में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। इससे खांसी, बलगम, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा और COPD के मरीजों में लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
2. दिल: हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषक कण शरीर में सूजन और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ा सकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। पहले से हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषण अधिक खतरनाक हो सकता है। गंभीर प्रदूषण के दौरान हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है।
3. दिमाग: सोचने-समझने की क्षमता पर असर
वायु प्रदूषण और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर शोध जारी है। कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क को याददाश्त और मानसिक कार्यक्षमता में गिरावट से जोड़ा गया है। प्रदूषण से शरीर में होने वाली सूजन और रक्त संचार पर असर इसके संभावित कारण माने जाते हैं।
4. आंखें: जलन, लालिमा और पानी आने की समस्या
प्रदूषित हवा में मौजूद धूल और रासायनिक कण आंखों की सतह को प्रभावित कर सकते हैं। इससे आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। संवेदनशील लोगों और कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।
5. किडनी: लंबे समय में बढ़ सकता है जोखिम
वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण शरीर में पहुंचकर सूजन और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं। शोध में लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क और किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, किसी एक दिन AQI 400 होने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत किडनी खराब हो जाएगी। लगातार संपर्क और पहले से मौजूद बीमारियां जोखिम बढ़ा सकती हैं।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?
AQI बेहद खराब या गंभीर स्तर पर हो तो बाहर की गतिविधियां कम रखें। जरूरी होने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। घर और गाड़ी की खिड़कियां बंद रखें तथा बाहर व्यायाम करने से बचें। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल या फेफड़ों के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में दर्द या अचानक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
ध्यान रखें: AQI 400 से ऊपर होना स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। बचाव के उपाय जोखिम कम कर सकते हैं, लेकिन प्रदूषण के संपर्क को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाते।
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