Sugar Price Hike News: देश में चीनी की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। चीनी कारोबार से जुड़े संगठन ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग की है। संगठन चाहता है कि मौजूदा 31 रुपये प्रति किलोग्राम की दर को बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो चीनी मिलों को आर्थिक राहत मिल सकती है। साथ ही गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
AISTA ने सरकार से क्यों की कीमत बढ़ाने की मांग?
AISTA के अध्यक्ष प्रफुल विठलानी के मुताबिक, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर है। इस दौरान उत्पादन लागत और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में चीनी मिलों के लिए मौजूदा कीमत पर कारोबार करना मुश्किल हो रहा है।
संगठन ने सरकार से न्यूनतम बिक्री मूल्य कम से कम 4,200 रुपये प्रति क्विंटल यानी 42 रुपये प्रति किलोग्राम करने का अनुरोध किया है। यह मौजूदा दर के मुकाबले करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।
किसानों के गन्ने का भुगतान करने में मिलेगी मदद
चीनी मिलों की कमाई और किसानों के गन्ने के भुगतान के बीच सीधा संबंध है। मिलों को अगर चीनी की बिक्री से बेहतर कीमत मिलती है, तो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे किसानों का बकाया भुगतान समय पर करने में मदद मिलने की संभावना है।
AISTA ने गुजरात में अपनाए जा रहे दो स्तरीय भुगतान मॉडल का अध्ययन करने का सुझाव भी दिया है। इसके तहत किसान चाहें तो गन्ना आपूर्ति के 7 से 14 दिनों के भीतर पूरा FRP भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। दूसरा विकल्प तीन किस्तों में भुगतान लेने का है, जिसमें किसानों को 10 फीसदी अतिरिक्त प्रीमियम देने का प्रस्ताव है।
गन्ने का FRP पहले ही हो चुका है तय
केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह कीमत 10.25 फीसदी की बेसिक रिकवरी दर के आधार पर तय की गई है। AISTA ने इस मूल्य को उचित बताते हुए इसका समर्थन किया है।
क्या आम लोगों के लिए महंगी होगी चीनी?
फिलहाल चीनी की MSP बढ़ाने की मांग की गई है और सरकार ने इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। यह भी समझना जरूरी है कि MSP चीनी मिलों के लिए फैक्ट्री गेट पर न्यूनतम बिक्री मूल्य है, न कि सीधे खुदरा दुकानों पर लागू होने वाला भाव।
अगर सरकार कीमत बढ़ाने का फैसला करती है, तो बाजार में चीनी की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, ग्राहकों को कितनी महंगी चीनी मिलेगी, यह मांग और आपूर्ति समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
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