AI Labeling In Music: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गाने बनाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। कई बार एआई से तैयार संगीत और इंसानों द्वारा बनाए गए गानों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को देखते हुए YouTube Music ने एआई से तैयार गानों की पहचान के लिए नया लेबल शुरू किया है। यह लेबल फिलहाल YouTube Music पर रोलआउट किया जा रहा है और आगे मुख्य YouTube ऐप पर भी उपलब्ध होगा। इसका मकसद श्रोताओं को यह बताना है कि किसी गाने को बनाने में एआई की कितनी भूमिका रही है।
कैसे काम करेगा YouTube Music का नया फीचर?
YouTube Music पर जिन गानों को मुख्य रूप से जनरेटिव एआई की मदद से बनाया गया है, उनके प्लेयर पेज पर खास लेबल दिखाई देगा। यूजर इस लेबल पर टैप करके गाने में एआई के इस्तेमाल से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देख सकेंगे।
इसमें ऐसे गाने भी शामिल हो सकते हैं, जिनका संगीत और आवाज दोनों एआई मॉडल की मदद से तैयार किए गए हों। YouTube अपने म्यूजिक पार्टनर्स से मिली जानकारी के साथ-साथ अपने डिटेक्शन टूल्स का भी इस्तेमाल करेगा। अगर पार्टनर किसी गाने में एआई के इस्तेमाल की जानकारी नहीं देते हैं, तो कंपनी अपने अन्य संकेतों के आधार पर भी उसका आकलन कर सकती है।
हर डिजिटल गाने पर नहीं लगेगा एआई लेबल
यह समझना जरूरी है कि किसी गाने को डिजिटल टूल से तैयार करने का मतलब यह नहीं है कि उसे एआई से बना गाना माना जाएगा। YouTube के दिशानिर्देशों में पूरी तरह एआई से बने, आंशिक रूप से एआई का इस्तेमाल करने वाले और बिना जनरेटिव एआई के तैयार किए गए कंटेंट के लिए अलग-अलग श्रेणियां हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कलाकार ने एआई की मदद से संगीत का कुछ हिस्सा तैयार किया और बाकी गायन या वाद्य यंत्र खुद रिकॉर्ड किए, तो यह आंशिक एआई इस्तेमाल की श्रेणी में आ सकता है। वहीं, केवल आवाज की मामूली गलतियां सुधारने के लिए ऑटो-ट्यून जैसे सामान्य टूल का इस्तेमाल करने पर गाने को जनरेटिव एआई से बना हुआ नहीं माना जाता।
Spotify, Apple Music और Tidal क्या कर रहे हैं?
एआई म्यूजिक की बढ़ती लोकप्रियता के बीच दूसरे म्यूजिक प्लेटफॉर्म भी अलग-अलग कदम उठा रहे हैं।
Spotify: प्लेटफॉर्म ने एआई से जुड़े कुछ लेबल और म्यूजिक स्पैम को नियंत्रित करने के उपाय अपनाए हैं। इसकी नीति में एआई से जुड़े कलाकारों और कंटेंट की पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।
Apple Music: रिपोर्टों के मुताबिक, Apple Music भी ‘Made With AI’ जैसे लेबल लाने की तैयारी कर रहा है, ताकि श्रोताओं को गानों में एआई के इस्तेमाल की जानकारी मिल सके।
Tidal: यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह एआई से तैयार माने गए गानों की पहचान के लिए लेबल का इस्तेमाल करता है। इसकी नीति में ऐसे गानों के रॉयल्टी भुगतान को लेकर भी नियम हैं।
Deezer: यह एआई से बने गानों को पहचानने और उन्हें अपनी सिफारिशों तथा एडिटोरियल प्लेलिस्ट से बाहर रखने की दिशा में काम कर रहा है।
क्या एआई से बने गाने सुनना बंद कर सकेंगे यूजर्स?
YouTube Music का नया फीचर फिलहाल मुख्य रूप से जानकारी देने के लिए है। कंपनी की घोषणा में एआई से बने सभी गानों को छिपाने या उन्हें सिफारिशों से हटाने के लिए किसी अलग फिल्टर की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए लेबल देखकर यूजर्स गाने में एआई की भूमिका समझ सकेंगे, लेकिन उन्हें सुनने से रोकने का विकल्प उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव संगीत की दुनिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे श्रोताओं को गाने की उत्पत्ति समझने में मदद मिल सकती है और कलाकारों के लिए भी एआई के इस्तेमाल की जानकारी देना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
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