WHO रिपोर्ट: कोविड के बाद दुनिया की सेहत में कितना बदलाव आया? इन बीमारियों ने बढ़ाई चिंता


 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की Global Health Estimates रिपोर्ट ने कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दुनिया में औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर 73.3 वर्ष हो गई। हालांकि, केवल ज्यादा समय तक जीना ही बेहतर स्वास्थ्य का संकेत नहीं है। स्वस्थ जीवन प्रत्याशा अभी भी महामारी से पहले के स्तर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है।

जीवन प्रत्याशा में हुई सुधार की वापसी

कोविड महामारी के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में मृत्यु दर बढ़ने से जीवन प्रत्याशा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। महामारी के बाद इसमें सुधार देखने को मिला है। लेकिन स्वस्थ जीवन के वर्षों और कुल जीवन प्रत्याशा के बीच अंतर अभी भी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है।

गैर-संचारी बीमारियां सबसे बड़ा खतरा

WHO के आंकड़ों के अनुसार, अब दुनिया में होने वाली करीब 74 फीसदी मौतें गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) से जुड़ी हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज और सांस से संबंधित पुरानी बीमारियां प्रमुख हैं। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खान-पान, तंबाकू और अन्य जोखिम कारक इन बीमारियों के बढ़ते बोझ में भूमिका निभाते हैं।

दिल की बीमारियां बनीं सबसे बड़ा बोझ

हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां वैश्विक स्तर पर मौत और बीमारी के सबसे बड़े कारणों में बनी हुई हैं। हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और खराब खान-पान जैसे कारक हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के लिए चुनौती यह है कि इन जोखिमों को समय रहते नियंत्रित किया जाए।

डायबिटीज और डिमेंशिया के मामले भी चिंता का कारण

रिपोर्ट में डायबिटीज और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के बढ़ते प्रभाव पर भी ध्यान दिया गया है। आबादी की उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का बोझ बढ़ रहा है, जबकि डायबिटीज का संबंध मोटापा और बदलती जीवनशैली जैसे कारकों से भी है।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडे में महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। तनाव, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां लोगों के जीवन की गुणवत्ता और काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

आगे किस दिशा में जरूरत?

WHO के आंकड़े बताते हैं कि महामारी के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई। अब केवल लोगों की उम्र बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें ज्यादा वर्षों तक स्वस्थ और सक्रिय जीवन देना भी जरूरी है। इसके लिए गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम, समय पर जांच, बेहतर पोषण, शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य पर समान रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

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