भारत vs वेस्टइंडीज: गुवाहाटी में 811 रन बनने पर क्यों भड़के कोच गौतम गंभीर? कहा- गेंदबाजों के साथ न्याय नहीं


 गुवाहाटी: भारत और वेस्टइंडीज के बीच गुवाहाटी में खेले गए दूसरे वनडे में रनों की जमकर बारिश हुई। दोनों टीमों ने मिलकर 811 रन बनाए। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 405 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, लेकिन भारतीय टीम ने इसे महज 43.3 ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारत की यह जीत वनडे इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी सफल रन चेज में शामिल हो गई।

मैच में बल्लेबाजों का दबदबा इतना रहा कि दोनों टीमों की ओर से कुल पांच शतक लगे। भारत के कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 223 रन की रिकॉर्ड पारी खेली, जबकि रोहित शर्मा ने 101 रन बनाए। वेस्टइंडीज की ओर से जॉन कैंपबेल, शाई होप और अमीर जांगू ने शतक लगाए।

बल्लेबाजों के दबदबे से खुश नहीं गंभीर

इतने बड़े स्कोर और रिकॉर्ड चेज के बावजूद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पिच से संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने मैच के बाद कहा कि क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच बेहतर मुकाबला होना चाहिए। उनके मुताबिक, गुवाहाटी की पिच पर गेंदबाजों के पास प्रभाव डालने के लिए बहुत कम मौके थे।

गंभीर ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में किसी युवा गेंदबाज के लिए 400 रन का बचाव करना या बल्लेबाजों को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने माना कि रिकॉर्ड, दर्शकों और प्रसारकों के लिहाज से ऐसा मुकाबला शानदार लग सकता है, लेकिन गेंदबाजों को भी कुछ मदद मिलनी चाहिए।

'ऐसी पिच पर गेंदबाजों के साथ न्याय नहीं'

गंभीर ने स्पष्ट कहा कि ऐसी पिच पर गेंदबाजों के प्रदर्शन को केवल उनके आंकड़ों से नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पिच से गेंदबाजों को लगभग कोई मदद नहीं मिलती, तो उनके खराब आंकड़े हमेशा उनकी खराब गेंदबाजी का संकेत नहीं होते।

उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा वनडे क्रिकेट में पांच फील्डर सर्किल के अंदर होने, दो नई गेंदों के इस्तेमाल और बल्लेबाजों की आक्रामक शैली के कारण गेंदबाजों के विकल्प पहले ही सीमित हैं। ऐसे में पिच पर भी अगर कोई सहायता नहीं मिलेगी तो मुकाबला एकतरफा हो सकता है।

युवा गेंदबाजों को लेकर गंभीर की चिंता

गुवाहाटी मुकाबले में डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज आकीब नबी ने 8.5 ओवर में 84 रन दिए और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। गुनूर बरार ने भी 2 विकेट लिए, लेकिन 96 रन खर्च किए। गंभीर का कहना था कि ऐसे आंकड़ों के आधार पर युवा गेंदबाजों पर तुरंत फैसला नहीं करना चाहिए। कोचिंग स्टाफ को यह देखना चाहिए कि गेंदबाज ने अपनी योजना और गेंदबाजी को कितनी अच्छी तरह लागू किया।

विश्व कप की तैयारी पर भी नजर

गंभीर ने 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारतीय टीम को खिलाड़ियों को कठिन परिस्थितियों में आजमाना होगा। उनका मानना है कि गेंदबाजों को दबाव वाले ओवरों में गेंदबाजी का अनुभव देना जरूरी है, क्योंकि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में दबाव अलग स्तर का होता है।

गुवाहाटी वनडे में भारत ने भले ही रिकॉर्ड रन चेज कर सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली, लेकिन मैच के बाद गंभीर की टिप्पणियों ने बल्ले और गेंद के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।

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