IMC 2026: जियो 6 लाख गांवों तक पहुंचाएगी बिना केबल इंटरनेट, अंतरिक्ष में भेजेगी 1,600 सैटेलाइट


 Jio Satellite Internet Plan: देश के दूर-दराज के इलाकों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए रिलायंस जियो ने बड़ी योजना पेश की है। कंपनी की प्रस्तावित योजना के तहत लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 1,600 सैटेलाइट स्थापित करने और 23 ग्राउंड स्टेशन बनाने की बात कही गई है। इस नेटवर्क के जरिए देश के छह लाख से ज्यादा गांवों तक इंटरनेट सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें समुद्री क्षेत्र, द्वीप और सीमावर्ती इलाके भी शामिल होंगे, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है।

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दौरान पेश की गई इस योजना का उद्देश्य डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और उन क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाना है, जहां फाइबर केबल या मोबाइल नेटवर्क का विस्तार करना मुश्किल है। हालांकि, यह फिलहाल प्रस्तावित योजना है। इसके क्रियान्वयन, समयसीमा और सेवाओं की उपलब्धता को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

क्या है जियो की सैटेलाइट इंटरनेट योजना?

रिलायंस जियो की योजना में कम ऊंचाई वाली कक्षा में सैटेलाइट का नेटवर्क तैयार करना शामिल है। लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब चक्कर लगाते हैं। इनका इस्तेमाल इंटरनेट और संचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है।

इस तकनीक के जरिए इंटरनेट सिग्नल उन क्षेत्रों तक पहुंचाए जा सकते हैं, जहां जमीन पर टावर या केबल आधारित नेटवर्क स्थापित करना कठिन और महंगा पड़ता है। प्रस्तावित नेटवर्क में 1,600 सैटेलाइट के साथ 23 ग्राउंड स्टेशन की भूमिका भी अहम होगी।

छह लाख से ज्यादा गांवों को जोड़ने का लक्ष्य

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना है। दूर-दराज के गांवों के अलावा समुद्री क्षेत्रों, द्वीपों और सीमावर्ती इलाकों को भी इसके दायरे में लाने की योजना है।

बेहतर कनेक्टिविटी मिलने पर इन क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और सरकारी ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे ग्रामीण नागरिकों और कारोबारियों को भी फायदा मिलने की संभावना है।

बिना केबल कैसे पहुंचेगा इंटरनेट?

सैटेलाइट इंटरनेट में उपयोगकर्ता का टर्मिनल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है। सैटेलाइट नेटवर्क इन सिग्नलों को ग्राउंड स्टेशन और अन्य नेटवर्क प्रणालियों के जरिए इंटरनेट से जोड़ता है।

इस व्यवस्था में हर गांव तक फाइबर केबल बिछाना जरूरी नहीं होता। हालांकि, उपयोगकर्ताओं को सेवा देने के लिए उपयुक्त उपकरण, बिजली, नेटवर्क प्रबंधन और आवश्यक बुनियादी ढांचे की जरूरत बनी रहती है।

कब शुरू होगी सेवा?

जियो की प्रस्तावित योजना से देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। लेकिन 1,600 सैटेलाइट की तैनाती, 23 ग्राउंड स्टेशन का निर्माण और छह लाख से अधिक गांवों तक सेवा पहुंचाना एक बड़ा तकनीकी प्रोजेक्ट है।

इसलिए योजना की घोषणा को सेवा शुरू होने के बराबर नहीं माना जा सकता। इसके लिए नियामकीय मंजूरियों, तकनीकी तैयारी, निवेश और कार्यान्वयन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

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