एचआईवी संक्रमण को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। आमतौर पर इसे असुरक्षित यौन संबंधों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन संक्रमित सुई या सिरिंज के इस्तेमाल से भी यह वायरस फैल सकता है। इसी वजह से टैटू बनवाते समय स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश में टैटू बनवाने के बाद एचआईवी संक्रमण से जुड़े मामलों की खबरों ने इस विषय पर चिंता बढ़ाई है। ऐसे में समझना जरूरी है कि टैटू बनवाने से संक्रमण का खतरा कब होता है और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां अपनानी चाहिए।
क्या टैटू बनवाने से फैल सकता है HIV?
एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। यदि टैटू बनाते समय पहले इस्तेमाल की गई संक्रमित सुई को बिना उचित सुरक्षा के दोबारा इस्तेमाल किया जाए, तो संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है।
टैटू बनाते समय सुई त्वचा में प्रवेश करती है। यदि उस पर संक्रमित व्यक्ति का खून मौजूद है और वही सुई किसी दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल की जाती है, तो वायरस शरीर में पहुंच सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर टैटू बनवाने से एचआईवी संक्रमण का खतरा होता है। प्रशिक्षित व्यक्ति से स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से टैटू बनवाने पर इस जोखिम को काफी हद तक रोका जा सकता है।
संक्रमित सुई से कैसे फैलता है वायरस?
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के खून के संपर्क में आने वाली सुई या सिरिंज को दोबारा इस्तेमाल करना संक्रमण का एक संभावित कारण है। इसके अलावा, टैटू बनाने के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर खून लगा हो और उन्हें सही तरीके से साफ या सुरक्षित न किया गया हो, तो भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।
एचआईवी हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठने, एक ही शौचालय इस्तेमाल करने या सामान्य सामाजिक संपर्क से नहीं फैलता। इसलिए इस संक्रमण से प्रभावित लोगों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।
टैटू बनवाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
1. नई सुई का इस्तेमाल सुनिश्चित करें: टैटू बनवाने से पहले देखें कि सुई नई और सीलबंद पैकेट से निकाली जा रही है।
2. साफ-सफाई पर ध्यान दें: टैटू बनाने वाला व्यक्ति दस्ताने पहने और उपकरणों की स्वच्छता का ध्यान रखे।
3. विश्वसनीय स्टूडियो चुनें: ऐसे टैटू स्टूडियो में जाएं जहां संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन किया जाता हो।
4. उपकरण साझा करने से बचें: सुई या खून के संपर्क में आने वाले उपकरणों का असुरक्षित तरीके से दोबारा इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
टैटू बनवाने के बाद संक्रमण का संदेह हो तो क्या करें?
यदि आपको लगता है कि टैटू बनवाते समय इस्तेमाल की गई सुई पहले किसी दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल हुई थी, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। एचआईवी के संभावित संपर्क के बाद कुछ स्थितियों में पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) दवा दी जा सकती है। इसे जितनी जल्दी हो सके शुरू करना जरूरी है और अधिकतम 72 घंटे के भीतर शुरू किया जाना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार एचआईवी जांच कराएं। शुरुआती जांच में संक्रमण का पता न चलने पर भी निर्धारित समय पर दोबारा जांच की जरूरत हो सकती है।
निष्कर्ष
टैटू बनवाना अपने आप में एचआईवी संक्रमण का कारण नहीं है। खतरा मुख्य रूप से संक्रमित खून के संपर्क में आई सुई या असुरक्षित उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल से होता है। इसलिए टैटू बनवाते समय स्वच्छता, नई सुई और सुरक्षित उपकरणों का ध्यान रखें। सही सावधानी अपनाकर संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।
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