FASTag इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों के लिए एक अहम बदलाव किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दिव्यांगजनों के लिए जारी किए जाने वाले छूट वाले FASTag के नियमों में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब ऐसे FASTag की वैधता पहले की तरह केवल एक साल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पात्रता के आधार पर 3 से 5 साल तक हो सकती है।
इस बदलाव का उद्देश्य दिव्यांग वाहन मालिकों के लिए FASTag से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाना है। पहले छूट वाले FASTag के लिए हर साल सत्यापन और वैधता से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था के बाद पात्र लाभार्थियों को लंबी अवधि की वैधता मिलने से बार-बार नवीनीकरण कराने की जरूरत कम होगी।
किसे मिलेगा इस नियम का फायदा?
यह सुविधा उन पात्र दिव्यांगजनों को मिलेगी, जो सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के तहत टोल शुल्क में छूट के लिए योग्य हैं। इसके लिए वाहन और लाभार्थी से जुड़े जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद FASTag की वैधता निर्धारित अवधि के लिए दी जाएगी।
अब 3 से 5 साल की वैधता
नई व्यवस्था में छूट वाले FASTag की वैधता 3 से 5 साल तक हो सकती है। वैधता की अवधि संबंधित पात्रता और निर्धारित नियमों के आधार पर तय की जाएगी। इससे लाभार्थियों को हर साल FASTag की वैधता बढ़ाने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है।
टोल प्लाजा पर क्या होगा?
पात्र वाहन जब टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो FASTag के जरिए वाहन की पहचान की जा सकेगी और लागू नियमों के अनुसार टोल छूट दी जाएगी। हालांकि, छूट का लाभ लेने के लिए FASTag का सही तरीके से पंजीकृत और वैध होना जरूरी होगा।
मंत्रालय के इस बदलाव से दिव्यांगजनों के लिए टोल छूट की सुविधा को अधिक सुगम बनाने की कोशिश की गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र लोगों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सकेगा और हर साल दस्तावेजी प्रक्रिया दोहराने की जरूरत कम हो सकती है।
FASTag से जुड़े किसी भी बदलाव में वाहन मालिकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपना FASTag और उससे जुड़े दस्तावेज सही रखें। साथ ही, छूट का लाभ लेने से पहले पात्रता और संबंधित नियमों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें।
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