तीन CM, 3 वादे और 5 डेडलाइन! पंजाब में ड्रग्स कारोबार पर क्यों नहीं लगा ब्रेक?


 पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडे का बड़ा हिस्सा रही है। अलग-अलग सरकारों ने ड्रग्स की सप्लाई रोकने, तस्करों पर कार्रवाई करने और युवाओं को नशे से बाहर निकालने के लिए कई अभियान और समयसीमाएं घोषित की हैं। इसके बावजूद राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसके पीछे केवल तस्करी का नेटवर्क नहीं, बल्कि बेरोजगारी, गरीबी, सीमावर्ती इलाकों की चुनौतियां, खेती से जुड़ी आर्थिक परेशानियां और भ्रष्टाचार जैसे कई कारकों की चर्चा होती रही है।

सिर्फ गिरफ्तारियों से नहीं सुलझेगी समस्या

पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां और बरामदगी सामने आती रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल छोटे स्तर के तस्करों या सप्लायरों को गिरफ्तार करने से पूरा नेटवर्क खत्म नहीं किया जा सकता। नशीले पदार्थों की मांग बनी रहने तक नए लोग इस अवैध कारोबार में प्रवेश कर सकते हैं।

यही वजह है कि ड्रग्स के खिलाफ रणनीति में सप्लाई रोकने के साथ-साथ नशामुक्ति, पुनर्वास, रोजगार और मांग कम करने पर भी जोर देने की जरूरत बताई जाती है।

तीन सरकारें, अलग-अलग दावे

पंजाब की अलग-अलग सरकारों ने सत्ता में आने के दौरान नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया। कई मौकों पर ड्रग्स को खत्म करने के लिए निश्चित समयसीमा भी बताई गई। लेकिन तय डेडलाइन के बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।

राजनीतिक दल एक-दूसरे पर नाकामी का आरोप लगाते रहे हैं। सरकारें कार्रवाई के आंकड़ों को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करती हैं, जबकि विपक्ष ड्रग्स की उपलब्धता और युवाओं में नशे की समस्या का हवाला देकर सवाल उठाता रहा है।

95 हजार करोड़ के कारोबार का दावा कितना पुख्ता?

पंजाब के ड्रग्स कारोबार को करीब 95,000 करोड़ रुपये का बताए जाने का दावा चर्चा में रहा है। हालांकि, ऐसे अवैध कारोबार का सटीक आकार तय करना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों में दर्ज नहीं होता। इसलिए इस आंकड़े को स्थापित तथ्य के बजाय एक अनुमान या दावा मानकर देखना जरूरी है।

अगर अवैध कारोबार में स्थानीय स्तर के लोगों से लेकर प्रभावशाली व्यक्तियों तक की भूमिका के आरोप सामने आते हैं, तो जांच का दायरा केवल सड़क स्तर के तस्करों तक सीमित नहीं रह सकता। वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों, सप्लाई चैन और कथित संरक्षण देने वालों की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सीमा पार से सप्लाई भी बड़ी चुनौती

पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ी भौगोलिक स्थिति भी ड्रग्स तस्करी के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों का खुलासा करती रही हैं। ड्रोन और अन्य माध्यमों के इस्तेमाल ने सीमा सुरक्षा की चुनौती को और जटिल बनाया है।

लेकिन समस्या का दूसरा पहलू राज्य के भीतर मौजूद मांग और वितरण नेटवर्क है। इसलिए इसे केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा मानना पर्याप्त नहीं होगा।

रोजगार और पुनर्वास पर भी ध्यान जरूरी

ड्रग्स के खिलाफ लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक और आर्थिक उपायों की भी जरूरत पड़ती है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, बेहतर नशामुक्ति सेवाएं, मानसिक-सामाजिक सहायता और इलाज के बाद पुनर्वास जैसी व्यवस्थाएं मांग को कम करने में भूमिका निभा सकती हैं।

इसलिए पंजाब में ड्रग्स की चुनौती को केवल ‘कितने लोग गिरफ्तार हुए’ के आंकड़े से समझना मुश्किल है। असली सवाल यह है कि सप्लाई नेटवर्क, अवैध धन, नशे की मांग और उससे जुड़े सामाजिक-आर्थिक कारणों पर एक साथ कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है। यही तय करेगा कि सरकारों की घोषित डेडलाइन के बाद भी यह समस्या कितनी कम होती है।

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