भारत में प्रदर्शनों पर अमेरिका की नजर: छह सांसदों ने रूबियो को लिखा पत्र, जयशंकर के सामने मुद्दा उठाने की मांग



India-US Relations: भारत में छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को लेकर अमेरिका के छह डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को पत्र लिखा है। सांसदों ने उनसे भारत दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य भारतीय अधिकारियों के सामने इन मुद्दों को उठाने का आग्रह किया है। पत्र में भारत में प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर हिरासत में लेने, जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और अमेरिका में भारतीय राजनयिक मिशनों द्वारा निगरानी किए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। 

किन छह सांसदों ने लिखा पत्र?

यह पत्र लिखने वाले अमेरिकी सांसदों में प्रामिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया शामिल हैं। इन सभी ने भारत में हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है।

सांसदों ने अपने पत्र में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने रूबियो से आग्रह किया कि वे भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान इन अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें।

सीजेपी और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों का जिक्र

सांसदों ने अपने पत्र में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया और कुछ लोगों को अनुचित तरीके से हिरासत में लिया गया।

पत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी चिंता जताई गई। सांसदों ने दावा किया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने का मुद्दा लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। ये आरोप सांसदों के पत्र में व्यक्त किए गए विचार हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। 

अमेरिका में निगरानी के भी लगाए आरोप

अमेरिकी सांसदों ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास और अमेरिका के अन्य शहरों में भारतीय वाणिज्य दूतावासों ने सीजेपी समर्थकों के प्रदर्शनों की तस्वीरें लेने के लिए फोटोग्राफरों को तैनात किया। उन्होंने इस मामले की जांच कराने की मांग भी की है।

सांसदों ने अमेरिकी प्रशासन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि अमेरिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को किसी विदेशी सरकार की कथित निगरानी या डराने-धमकाने की कार्रवाई का सामना न करना पड़े।

भारत पहले भी जता चुका है आपत्ति

अमेरिकी सांसदों की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब भारत और अमेरिका के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इससे पहले अमेरिकी सांसद प्रामिला जयपाल की भारत की मतदाता सूची प्रक्रिया से जुड़ी टिप्पणियों पर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने ऐसी टिप्पणियों को भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया था। 

सांसदों ने रूबियो से कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच कराने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कारण हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की समीक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने भारत को अमेरिकी हथियारों की बिक्री से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत भी समीक्षा करने की मांग रखी है।

अब इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन का रुख और भारत की प्रतिक्रिया दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

आरोपों को और संतुलित भाषा देंशीर्षक को अधिक संक्षिप्त बनाएंरूबियो की भूमिका साफ करें

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