अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में क्या अंतर है?
अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन दोनों की प्रकृति अलग है। अस्थमा एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें वायुमार्ग में सूजन और संकुचन के कारण सांस लेने में परेशानी होती है। इसके लक्षण समय-समय पर बढ़ सकते हैं और फिर कम हो सकते हैं।
वहीं, ब्रोंकाइटिस में फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली श्वसन नलियों में सूजन आ जाती है। यह बीमारी अक्सर वायरल संक्रमण के कारण होती है। इसके अलावा, लंबे समय तक धूम्रपान और प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस भी हो सकता है।
लक्षणों से कैसे पहचानें अंतर?
| लक्षण | अस्थमा | ब्रोंकाइटिस |
|---|---|---|
| खांसी | बार-बार हो सकती है, खासकर रात में | अक्सर लगातार होती है |
| बलगम | हो सकता है, लेकिन हमेशा नहीं | आमतौर पर बलगम आ सकता है |
| सांस फूलना | बार-बार या दौरे के रूप में | संक्रमण या सूजन के दौरान |
| सीने में जकड़न | आम लक्षण | खांसी के साथ हो सकती है |
| बुखार | आमतौर पर अस्थमा का लक्षण नहीं | वायरल संक्रमण में हो सकता है |
| लक्षणों की अवधि | लंबे समय तक रह सकते हैं और बीच-बीच में बढ़ सकते हैं | तीव्र ब्रोंकाइटिस में आमतौर पर 2-3 सप्ताह में सुधार होता है |
अस्थमा के लक्षण कब बढ़ते हैं?
अस्थमा के मरीजों में धूल, धुआं, परागकण, ठंडी हवा, वायु प्रदूषण और व्यायाम से लक्षण बढ़ सकते हैं। रात और सुबह के समय खांसी या सांस लेने में परेशानी अधिक महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में वायरल संक्रमण भी अस्थमा के दौरे को बढ़ा सकता है।
अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर का इस्तेमाल और उन चीजों से बचाव जरूरी है, जिनसे लक्षण बढ़ते हैं।
ब्रोंकाइटिस के लक्षण कितने दिन रहते हैं?
एक्यूट ब्रोंकाइटिस अक्सर सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण के बाद होता है। इसमें खांसी, बलगम, गले में खराश, थकान और कभी-कभी हल्का बुखार हो सकता है। अधिकतर मामलों में लगभग तीन सप्ताह के भीतर सुधार होने लगता है।
अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहती है, बार-बार ब्रोंकाइटिस होता है या धूम्रपान का इतिहास है, तो डॉक्टर क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या फेफड़ों की दूसरी बीमारियों की जांच कर सकते हैं। वायरल ब्रोंकाइटिस में एंटीबायोटिक दवाएं आमतौर पर फायदा नहीं करतीं। <Cite refs={["turn953463search0","turn953463search3","turn953463search6"]}/>
दोनों बीमारियों की जांच कैसे होती है?
सिर्फ लक्षण देखकर अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता। डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, खांसी की अवधि, बलगम, सांस की आवाज और अन्य लक्षणों की जांच करते हैं।
स्पाइरोमेट्री: फेफड़ों की कार्यक्षमता और सांस छोड़ने की क्षमता की जांच के लिए।
पीक फ्लो टेस्ट: सांस छोड़ते समय हवा के प्रवाह को मापने के लिए।
अन्य जांच: जरूरत के अनुसार छाती का एक्स-रे या संक्रमण से संबंधित जांच की जा सकती है।
अस्थमा की पुष्टि के लिए लक्षणों के साथ सांस की जांच जैसे वस्तुनिष्ठ परीक्षण भी महत्वपूर्ण हैं
कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
यदि खांसी तीन सप्ताह से अधिक बनी रहे, बलगम में खून आए, सीने में दर्द हो या सांस फूलने की समस्या बढ़े, तो डॉक्टर से संपर्क करें। अगर सांस लेने में बहुत परेशानी हो, बोलना मुश्किल हो जाए या होंठ नीले पड़ने लगें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष: अस्थमा में लक्षण बार-बार उभर सकते हैं, जबकि तीव्र ब्रोंकाइटिस अक्सर संक्रमण के बाद होता है और कुछ सप्ताह में ठीक हो जाता है। हालांकि, दोनों के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं। सही पहचान और इलाज के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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