शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई हार्मोन और ग्रंथियां मिलकर काम करती हैं। इनमें थायरॉइड ग्रंथि के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन इसके पीछे मौजूद पैराथायरॉइड ग्रंथियों के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। आकार में बेहद छोटी होने के बावजूद ये ग्रंथियां शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इनका मुख्य काम शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करना है। अगर ये ठीक से काम न करें, तो हड्डियों, किडनी, मांसपेशियों और नसों पर इसका असर पड़ सकता है।
क्या होती हैं पैराथायरॉइड ग्रंथियां?
पैराथायरॉइड गर्दन में थायरॉइड ग्रंथि के पीछे स्थित छोटी-छोटी ग्रंथियां होती हैं। आमतौर पर इनकी संख्या चार होती है। ये पैराथायरॉइड हार्मोन (PTH) का निर्माण करती हैं।
इस हार्मोन की मदद से शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन बना रहता है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों के काम करने और नसों के जरिए संदेश पहुंचाने के लिए भी जरूरी है।
शरीर में क्या काम करता है PTH हार्मोन?
पैराथायरॉइड ग्रंथियों से निकलने वाला PTH हार्मोन मुख्य रूप से तीन तरीकों से कैल्शियम का स्तर नियंत्रित करता है।
हड्डियों पर असर: जरूरत पड़ने पर हड्डियों से कैल्शियम रक्त में पहुंचाने की प्रक्रिया को बढ़ाता है।
किडनी में भूमिका: किडनी के जरिए कैल्शियम के उत्सर्जन को कम करता है और फॉस्फोरस के उत्सर्जन को बढ़ाता है।
विटामिन D का सक्रिय होना: किडनी में सक्रिय विटामिन D बनने में मदद करता है, जिससे आंतों में कैल्शियम का अवशोषण बढ़ता है।
इस तरह PTH हार्मोन शरीर में कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
पैराथायरॉइड ज्यादा सक्रिय होने पर क्या होता है?
जब पैराथायरॉइड ग्रंथियां जरूरत से ज्यादा PTH बनाने लगती हैं, तो इस स्थिति को हाइपरपैराथायरॉइडिज्म कहते हैं। इससे खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है।
इसके कुछ प्रमुख लक्षण हैं:
हड्डियों और जोड़ों में दर्द।
बार-बार किडनी में पथरी होना।
मांसपेशियों में कमजोरी।
थकान और सुस्ती।
कब्ज और पेट से जुड़ी समस्याएं।
अधिक प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना।
लंबे समय तक इस समस्या का इलाज न होने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
पैराथायरॉइड कम सक्रिय होने पर क्या होता है?
जब शरीर में PTH हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता, तो इसे हाइपोपैराथायरॉइडिज्म कहा जाता है। इससे खून में कैल्शियम का स्तर कम हो सकता है।
इसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट, मांसपेशियों में ऐंठन, चेहरे में झटके और गंभीर मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं।
कैसे होती है पैराथायरॉइड की जांच?
पैराथायरॉइड से जुड़ी समस्या की पहचान के लिए डॉक्टर खून की कुछ जांच कराने की सलाह देते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
ब्लड कैल्शियम टेस्ट।
पैराथायरॉइड हार्मोन (PTH) टेस्ट।
फॉस्फोरस लेवल की जांच।
विटामिन D टेस्ट।
किडनी फंक्शन टेस्ट।
जरूरत पड़ने पर हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट भी कराया जा सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर आपको बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन, हड्डियों में दर्द, किडनी स्टोन या हाथ-पैरों में लगातार झनझनाहट की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें। केवल लक्षणों के आधार पर पैराथायरॉइड की बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए जरूरी ब्लड टेस्ट और मेडिकल जांच कराना महत्वपूर्ण है।
याद रखें: पैराथायरॉइड ग्रंथियां छोटी जरूर हैं, लेकिन शरीर में कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने के लिए इनका सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है।
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