बांग्लादेश में तुर्किये की मदद से ड्रोन फैक्टरी की योजना, सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर भारत के सामने नई चुनौती


 भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव के बीच ढाका की रक्षा तैयारियों में तेजी ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बांग्लादेश के बोगुरा में तुर्किये के सहयोग से ड्रोन निर्माण और मरम्मत से जुड़ी फैक्टरी स्थापित करने की योजना सामने आई है। रणनीतिक नजरिए से यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बोगुरा भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के अपेक्षाकृत करीब स्थित है। यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला अहम मार्ग है।

ड्रोन फैक्टरी क्यों महत्वपूर्ण?

इस योजना को केवल ड्रोन निर्माण की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। प्रस्तावित केंद्र में ड्रोन बनाने के साथ-साथ उनकी असेंबली, रखरखाव और मरम्मत की क्षमता विकसित होने की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाले वर्षों में बांग्लादेश की सैन्य ड्रोन क्षमता बढ़ सकती है। बोगुरा के आसपास नए एयरफोर्स बेस और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार की योजनाओं का भी जिक्र किया गया है। इससे इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व और बढ़ सकता है।

भारत के लिए चिंता का प्रमुख कारण सिलीगुड़ी कॉरिडोर है। यह संकरा भू-भाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसलिए इसके आसपास किसी भी सैन्य या रणनीतिक गतिविधि को भारत की सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।

चीन और तुर्किये से बढ़ रहा सहयोग

बांग्लादेश पहले से ही तुर्किये से ड्रोन खरीदता रहा है। इसके अलावा जनवरी में बांग्लादेश एयरफोर्स ने देश में ड्रोन निर्माण और असेंबली प्लांट स्थापित करने के लिए चीन की कंपनी चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन इंटरनेशनल के साथ समझौता किया था। इन सहयोगों से बांग्लादेश को ड्रोन निर्माण, इंजीनियरिंग, असेंबली और रखरखाव से जुड़ी तकनीकी क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।

भारत के लिए क्या है रणनीतिक चुनौती?

क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव के बीच भारत के सामने चुनौती केवल बांग्लादेश की मौजूदा सैन्य क्षमता को देखने की नहीं, बल्कि उसकी भविष्य की क्षमताओं का आकलन करने की भी है। अगले कुछ वर्षों में ड्रोन तकनीक और उत्पादन क्षमता में होने वाला विस्तार पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

ऐसे में भारत को अपनी पूर्वी सुरक्षा नीति में सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर की रणनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक तैयारी पर जोर देना होगा। साथ ही, बांग्लादेश के चीन और तुर्किये के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग पर भी लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

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