जन्मदिन पर लवलीना बोरगोहेन का गोल्डन पंच, एशियाड में जीता स्वर्ण; मैरी कॉम की बराबरी


 भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने अपने 29वें जन्मदिन को बेहद खास बना दिया। उन्होंने एशियन गेम्स में महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल मुकाबले में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 के एकतरफा स्कोर से हराया। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने न सिर्फ देश के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया, बल्कि भारतीय महिला बॉक्सिंग के इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया।

फाइनल मुकाबले में लवलीना ने शुरुआत से ही आक्रामक और नियंत्रित अंदाज में बॉक्सिंग की। उन्होंने अपनी लंबाई और रेंज का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए चीनी मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा। मुकाबले के दौरान लवलीना ने लगातार सटीक पंच लगाए और अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया। जजों ने सभी पांचों राउंड के बाद लवलीना के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें 5-0 से विजेता घोषित किया।

लवलीना की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में यह एशियाई खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। इसके साथ ही महिला मुक्केबाजी में भारत के एशियाड गोल्ड मेडल की संख्या भी दो हो गई है। इससे पहले महान भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। लवलीना की इस उपलब्धि ने उन्हें मैरी कॉम की उस खास उपलब्धि की बराबरी करने वालों में शामिल कर दिया है।

लवलीना बोरगोहेन पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारतीय महिला मुक्केबाजों में उनका नाम शामिल है। ऐसे में एशियन गेम्स का यह स्वर्ण उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ता है।

अपने जन्मदिन पर गोल्ड जीतने का मौका लवलीना के लिए भावनात्मक रूप से भी खास रहा। जिस दिन वह अपना 29वां जन्मदिन मना रही थीं, उसी दिन रिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने तिरंगे की शान बढ़ाई। उनकी इस जीत के बाद भारतीय खेल प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

लवलीना का यह गोल्ड भारतीय बॉक्सिंग के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 75 किलोग्राम वर्ग में एशियाड का पहला स्वर्ण जीतकर उन्होंने इस भार वर्ग में भारत की नई पहचान बनाई है। अब उनकी इस ऐतिहासिक जीत को भारतीय महिला बॉक्सिंग की यादगार उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

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