Are Sugary Drinks Bad for Kids: बच्चों को मीठा खाना और पीना पसंद होता है। कई माता-पिता बच्चों को पैकेट वाला जूस, सॉफ्ट ड्रिंक, फ्लेवर्ड मिल्क या मीठे शरबत देते हैं। कभी-कभार इनका सेवन चिंता की बात नहीं है, लेकिन अगर बच्चे रोजाना और बार-बार ऐसे पेय पीते हैं, तो उनकी सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अधिक मात्रा में चीनी लेने से दांतों में सड़न, वजन बढ़ने और खानपान की आदतों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
मीठे पेय बच्चों के लिए क्यों हो सकते हैं नुकसानदायक?
मीठे पेय में अक्सर अधिक मात्रा में अतिरिक्त चीनी होती है। इनसे शरीर को कैलोरी मिलती है, लेकिन जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते। खासकर छोटे बच्चों में मीठे पेय बार-बार पीने से पौष्टिक भोजन और दूध जैसे विकल्पों की जगह कम हो सकती है।
पैकेट पर ‘फ्रूट जूस’, ‘नेचुरल’ या ‘हेल्दी’ लिखा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि पेय में चीनी कम होगी। फलों के रस में भी प्राकृतिक शर्करा होती है, जबकि कुछ पैक्ड ड्रिंक्स में अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है। इसलिए उत्पाद खरीदते समय पोषण संबंधी जानकारी और सामग्री की सूची पढ़ना जरूरी है।
दांतों में सड़न का बढ़ सकता है खतरा
बच्चों को दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मीठे पेय पिलाने से दांत लंबे समय तक शर्करा के संपर्क में रह सकते हैं। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया शर्करा का इस्तेमाल करके एसिड बनाते हैं, जो दांतों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। समय के साथ इससे कैविटी और दांतों में दर्द की समस्या हो सकती है।
सोने से पहले मीठे पेय देना, खासकर बोतल के जरिए, छोटे बच्चों के दांतों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। रात में सोने से पहले दांत साफ करना और दिनभर मीठे पेय की बारंबारता कम रखना उपयोगी है।
वजन बढ़ने और दूसरी समस्याओं का जोखिम
मीठे पेय से मिलने वाली कैलोरी पेट भरने का उतना एहसास नहीं देती जितना ठोस भोजन देता है। ऐसे में बच्चा सामान्य भोजन के अलावा अतिरिक्त कैलोरी भी ले सकता है। लंबे समय तक यह आदत बनी रहने पर वजन बढ़ने और मोटापे का जोखिम बढ़ सकता है।
अधिक चीनी वाले पेय का नियमित सेवन असंतुलित खानपान की आदतों को भी बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, किसी बच्चे का वजन केवल मीठे पेय पर निर्भर नहीं करता। उसकी उम्र, शारीरिक गतिविधि, कुल आहार, नींद और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
बच्चों को क्या पिलाना बेहतर है?
बच्चों की प्यास बुझाने के लिए सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प है। उम्र के अनुसार बिना अतिरिक्त चीनी वाला दूध भी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है। साबुत फल देना जूस की तुलना में बेहतर है, क्योंकि इससे फाइबर भी मिलता है।
रोजाना सॉफ्ट ड्रिंक्स और अतिरिक्त चीनी वाले पेय देने से बचें।
पैकेट वाले जूस और फ्लेवर्ड मिल्क का लेबल देखकर चीनी की मात्रा जांचें।
बच्चों को दिनभर पानी पीने की आदत डालें।
मीठे पेय को बोतल में भरकर लंबे समय तक पीने की आदत न बनने दें।
बच्चों के दांतों की नियमित सफाई कराएं और जरूरत के अनुसार दंत चिकित्सक से जांच करवाएं।
कितनी उम्र में क्या सावधानी जरूरी है?
दो साल से कम उम्र के बच्चों को अतिरिक्त चीनी वाले पेय नहीं देने चाहिए। छोटे बच्चों को फलों का रस देने के बजाय साबुत फल प्राथमिकता से देना बेहतर है। शिशुओं के लिए मां का दूध या उम्र के अनुसार उपयुक्त फॉर्मूला मुख्य पेय रहता है; छह महीने से पानी की थोड़ी मात्रा दी जा सकती है, जबकि एक साल से कम उम्र में गाय का दूध मुख्य पेय के रूप में नहीं देना चाहिए।
निष्कर्ष: बच्चों को कभी-कभार मीठा पेय देने और इसे रोजमर्रा की आदत बना देने में फर्क है। पानी, पौष्टिक भोजन और साबुत फलों को प्राथमिकता देकर दांतों की सड़न तथा अधिक चीनी से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
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