राजस्थान के सीकर में 8 नवंबर 1987 को जन्मीं मोना अग्रवाल महज नौ महीने की उम्र में पोलियो से प्रभावित हो गई थीं। इस बीमारी के कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हुए। हालांकि, शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और कला विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने नौकरी भी की और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाए।
मोना की खेल यात्रा राइफल शूटिंग से शुरू नहीं हुई थी। उन्होंने पहले पैरा एथलेटिक्स में शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो जैसी स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। इसके बाद पैरा पावरलिफ्टिंग में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। अलग-अलग खेलों में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने निशानेबाजी को अपना अगला लक्ष्य बनाया।
सिटिंग वॉलीबॉल में भी हासिल की बड़ी उपलब्धि
मोना अग्रवाल ने सिटिंग वॉलीबॉल में भी शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में उन्होंने राष्ट्रीय सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में राजस्थान की महिला टीम की कप्तानी की और टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। यह उपलब्धि उनके खेल कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।
हालांकि, खेल के इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियों और मातृत्व के कारण उनके लिए खेल को समय देना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा।
मां बनने के बाद दिसंबर 2021 में थामी राइफल
मोना ने दिसंबर 2021 में राइफल शूटिंग की शुरुआत की। उनके बेटे का जन्म अप्रैल 2021 में हुआ था। मां बनने के बाद नए खेल में करियर बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अभ्यास जारी रखा।
उन्होंने जयपुर की एकलव्य स्पोर्ट्स शूटिंग अकादमी में कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। शुरुआत में राइफल संभालने, सही पोजिशन बनाने और निशाने पर एकाग्रता बनाए रखने के लिए उन्हें लगातार अभ्यास करना पड़ा।
निशानेबाजी के उपकरण भी महंगे थे। रिपोर्टों के अनुसार, मोना और उनके पति ने वर्ष 2022 में उनकी पहली राइफल खरीदने के लिए पैसे जुटाए। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल में आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।
तीन साल में पैरालंपिक पदक तक का सफर
मोना की मेहनत का परिणाम जल्द सामने आने लगा। वर्ष 2022 में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीता। वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए और दक्षिण कोरिया के चांगवोन में विश्व कप की महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
मार्च 2024 में नई दिल्ली में आयोजित विश्व कप में उन्होंने 250.7 अंक हासिल कर एशियाई रिकॉर्ड बनाया। इस प्रदर्शन ने पेरिस पैरालंपिक के लिए भारत का कोटा हासिल करने में मदद की।
इसके बाद पेरिस पैरालंपिक 2024 में मोना ने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 2024 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण से रचा नया इतिहास
मोना अग्रवाल ने अब 2026 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है। महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 फाइनल में उन्होंने 250.0 अंक हासिल किए, जबकि भारत की अवनि लेखरा 249.6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दोनों के बीच केवल 0.4 अंक का अंतर रहा।
मोना की यह जीत बताती है कि सफलता हासिल करने के लिए उम्र या शुरुआत का समय ही निर्णायक नहीं होता। दृढ़ इच्छाशक्ति, लगातार अभ्यास और परिवार का सहयोग भी किसी खिलाड़ी को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पोलियो से प्रभावित होने से लेकर अलग-अलग खेलों में अपनी पहचान बनाने और फिर अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने तक मोना अग्रवाल का सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
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