कौन हैं दीप्ति जीवांजी? एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, कभी तानों का किया सामना


 भारतीय पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। एशियन पैरा गेम्स 2026 में उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। तेलंगाना के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक भेदभाव का सामना करने वाली दीप्ति आज दुनिया के प्रमुख पैरा एथलीटों में अपनी जगह बना चुकी हैं।

कौन हैं दीप्ति जीवांजी?

दीप्ति जीवांजी तेलंगाना की रहने वाली भारतीय पैरा एथलीट हैं। वह बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों की टी20 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करती हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया है।

उनकी सफलता खास इसलिए है, क्योंकि सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल को अपना करियर बनाया। उनके प्रदर्शन ने यह दिखाया कि सही प्रशिक्षण, अवसर और आत्मविश्वास से मुश्किल परिस्थितियों को पार किया जा सकता है।

15 साल की उम्र में कोच ने पहचानी प्रतिभा

दीप्ति का जन्म तेलंगाना के कलेड़ा गांव में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बचपन में अपनी बौद्धिक दिव्यांगता के चलते दीप्ति को सामाजिक तानों और भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। <Cite refs={["turn258675view0"]}/>

लेकिन इन मुश्किलों के बीच उनकी दौड़ने की प्रतिभा ने नई राह दिखाई। महज 15 साल की उम्र में भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच एन. रमेश ने एक राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उनकी क्षमता पहचानी। इसके बाद उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण मिलने लगा और उनका खेल करियर आगे बढ़ने लगा।

विश्व चैंपियनशिप से पैरालंपिक तक का सफर

दीप्ति ने वर्ष 2023 के एशियन पैरा गेम्स में महिला 400 मीटर टी20 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2024 में जापान के कोबे में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 55.06 सेकंड के समय के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड हासिल किया।

उसी वर्ष पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने 400 मीटर टी20 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। वह पैरालंपिक में पदक जीतने वाली बौद्धिक दिव्यांगता वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 

56.36 सेकंड में जीता एशियन पैरा गेम्स का गोल्ड

जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में दीप्ति ने महिला 400 मीटर टी20 फाइनल में 56.36 सेकंड का समय निकाला और नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। जापान की नीना कन्नो 58.92 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि अकाने काटो ने कांस्य पदक जीता। 

दीप्ति की कहानी बताती है कि सामाजिक चुनौतियां और आर्थिक कठिनाइयां किसी की प्रतिभा का अंतिम निर्धारण नहीं करतीं। मेहनत, सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। आज दीप्ति जीवांजी की सफलता देश के युवा खिलाड़ियों और पैरा एथलीटों के लिए प्रेरणा है।

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