भारत में फैटी लिवर की समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रह गई है। बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं, जिसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। World Congress of Gastroenterology 2026 में भारत में फैटी लिवर की बढ़ती समस्या और इससे जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में करीब 100 वयस्कों में से 39 में फैटी लिवर की समस्या पाई जाती है, जबकि बच्चों में इसका अनुमानित प्रसार करीब 35.4 प्रतिशत बताया गया है।
फैटी लिवर को अक्सर एक 'साइलेंट' बीमारी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने के साथ लिवर में भी फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में बच्चा सामान्य नजर आ सकता है, लेकिन लंबे समय तक समस्या बने रहने पर लिवर में सूजन और अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
बच्चों में क्यों बढ़ रहा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज फैटी लिवर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। आजकल बच्चों की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि कम होना, लंबे समय तक स्क्रीन देखना और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन जैसी आदतें वजन बढ़ने की समस्या को बढ़ा सकती हैं।
इसके अलावा, परिवार में मोटापा या डायबिटीज का इतिहास भी बच्चे के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, हर अधिक वजन वाले बच्चे को फैटी लिवर होगा, ऐसा जरूरी नहीं है और इसके लिए चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता होती है।
शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते
फैटी लिवर की समस्या में कई बच्चों को शुरुआत में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। कुछ बच्चों में थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता या वजन से जुड़ी अन्य समस्याएं दिखाई दे सकती हैं, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती।
इसी वजह से बच्चे के वजन, खान-पान और शारीरिक गतिविधि पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। अगर बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है या उसे मोटापा, डायबिटीज जैसी समस्या है तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
माता-पिता क्या करें?
बच्चों की डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। मीठे पेय, अत्यधिक प्रोसेस्ड और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही बच्चे को उम्र के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।
फैटी लिवर की आशंका होने पर माता-पिता खुद से कोई दवा या सप्लीमेंट शुरू न करें। डॉक्टर बच्चे की स्थिति, वजन, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर जांच के आधार पर आगे की सलाह दे सकते हैं।
बच्चों में फैटी लिवर का बढ़ता प्रसार इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि स्वस्थ खान-पान और सक्रिय जीवनशैली की आदतें बचपन से ही विकसित करना जरूरी है।
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