विजयादशमी पर राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने दी बधाई, देशवासियों से विकसित भारत में योगदान की अपील


 विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने इस पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों के सुख, समृद्धि और सफलता की कामना की। राष्ट्रपति ने धर्म और न्याय की जीत का संदेश देते हुए नागरिकों से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने विजयादशमी को सकारात्मकता, साहस और सद्कर्मों की प्रेरणा देने वाला पर्व बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिया धर्म और न्याय का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक बताया। यह पर्व लोगों को सत्य, नैतिकता और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने देशवासियों से आपसी सद्भाव, सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत बनाने का आह्वान किया। साथ ही, देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभाने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।

विजयादशमी का त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह लोगों को याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुख-समृद्धि की कामना की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजयादशमी पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों के जीवन में सुख, सौभाग्य और सफलता की कामना की। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है और लोगों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री के संदेश का व्यापक उद्देश्य देशवासियों को त्योहार के सांस्कृतिक और नैतिक महत्व से जोड़ना है। विजयादशमी का अवसर समाज में साहस, आत्मविश्वास और सद्भाव जैसे मूल्यों को मजबूत करने का संदेश भी देता है।

क्यों मनाई जाती है विजयादशमी?

विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। वहीं, कई परंपराओं में यह पर्व मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी मनाने के तरीके अलग हैं। कहीं रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है, तो कहीं दुर्गा पूजा के समापन के साथ पर्व मनाया जाता है।

विकसित भारत के संकल्प से जुड़ा पर्व

विजयादशमी केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सकारात्मक बदलाव का अवसर भी है। सत्य, न्याय, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को अपनाकर नागरिक देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के शुभकामना संदेशों के बीच यह पर्व देशवासियों को एकता, सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के साझा संकल्प की याद दिलाता है।

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