Heart Health: हृदय रोग दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खानपान और तनाव के कारण कम उम्र के लोगों में भी दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में समय रहते हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
दिल की सेहत का आकलन करने के लिए कुछ जरूरी चीजों की निगरानी घर पर की जा सकती है। ब्लड प्रेशर, आराम की स्थिति में हार्ट रेट, वजन और कमर का माप ऐसे संकेत हैं, जिनसे हृदय रोगों से जुड़े कुछ जोखिमों का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, इनकी मदद से यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी है या नहीं।
1. ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करें
हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग और स्ट्रोक का एक प्रमुख जोखिम कारक है। कई बार इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता, इसलिए नियमित जांच जरूरी है।
घर पर ब्लड प्रेशर मापने के लिए सही आकार वाले कफ का इस्तेमाल करें। जांच से पहले पांच मिनट आराम से बैठें और पैर जमीन पर रखें। हाथ को हृदय के स्तर पर सहारा देकर रीडिंग लें। बेहतर जानकारी के लिए एक मिनट के अंतर से दो रीडिंग लें और उनका रिकॉर्ड रखें।
यदि ब्लड प्रेशर बार-बार सामान्य से अधिक आता है, तो डॉक्टर से सलाह लें। बहुत अधिक रीडिंग के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी या देखने-बोलने में अचानक दिक्कत हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
2. आराम की स्थिति में हार्ट रेट देखें
हार्ट रेट यानी एक मिनट में दिल की धड़कनों की संख्या भी स्वास्थ्य का एक संकेत है। अधिकांश वयस्कों में आराम की स्थिति में हार्ट रेट 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच होता है। खिलाड़ियों और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में यह इससे कम भी हो सकता है।
हार्ट रेट मापने के लिए कलाई पर अंगूठे की तरफ दो उंगलियां रखें और धड़कन महसूस करें। 60 सेकंड तक गिनकर रीडिंग नोट करें। इसे आराम करने के बाद मापना बेहतर होता है।
यदि हार्ट रेट लगातार बहुत तेज या धीमा रहता है, धड़कन अनियमित लगती है या इसके साथ चक्कर, बेहोशी और सांस फूलने जैसी परेशानी होती है, तो चिकित्सकीय जांच कराएं।
3. वजन और कमर के माप पर ध्यान दें
अधिक वजन और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए समय-समय पर वजन और कमर का माप लेना उपयोगी है।
केवल वजन से पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। डॉक्टर उम्र, लंबाई, कमर के माप और दूसरे स्वास्थ्य संकेतों को मिलाकर जोखिम का आकलन करते हैं। वजन में अचानक या बिना कारण बदलाव होने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
4. अपनी जीवनशैली और लक्षणों को समझें
कुछ आदतें दिल की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, ज्यादा नमक और संतृप्त वसा वाला भोजन, शारीरिक निष्क्रियता, नींद की कमी और लगातार तनाव शामिल हैं। परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर असामान्य रूप से सांस फूलना, सीने में दबाव या दर्द, बार-बार चक्कर आना और सामान्य गतिविधियों में अचानक थकान महसूस होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें।
5. क्या घर पर ही दिल की बीमारी का पता चल सकता है?
घर पर ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और वजन की निगरानी से जोखिम के संकेत मिल सकते हैं, लेकिन इनसे हृदय रोग की पुष्टि नहीं होती। कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच, ईसीजी या दूसरी जांचों की जरूरत व्यक्ति की उम्र, लक्षणों और जोखिम के आधार पर पड़ सकती है।
सीने में अचानक दर्द या दबाव, दर्द का बांह, पीठ या जबड़े तक फैलना, ठंडा पसीना, सांस फूलना या बेहोशी जैसे लक्षण हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू जांच करने या लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
संतुलित भोजन करें और फल, सब्जियां, साबुत अनाज तथा दालों को आहार में शामिल करें।
डॉक्टर की सलाह और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।
पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के तरीके अपनाएं।
ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराएं।
याद रखें: घर पर निगरानी हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का अच्छा तरीका है, लेकिन नियमित मेडिकल चेकअप का विकल्प नहीं। समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर दिल से जुड़ी कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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