नरेंद्र मोहन की कविताओं में मानसिक स्वास्थ्य के मूल मंत्र जागरण एजुकेशन फाउंडेशन ने 'अंतस् अग्नि' समारोह के जरिए नरेंद्र मोहन को किया याद



 कानपुर. " अनन्त रंगों से सजा-खिलखिलाता, हंसता, हिलोरें लेता यह जीवन क्यों बने दास, तुम्हारे दिए अहंकार का। मैं और तुम के व्यापार का. देखो अहंकार का प्रेत मुझे सताने न पाए, प्रकाश का अभिमान मुझे मुकुट न पहनाए, अंधकार का भय मेरी चेतना न हरने पाए" कवि, पत्रकार, साहित्यकार और संसद सदस्य की चतुर्मुखी भूमिका निभाते हुए नरेंद्र मोहन जी ने जीवन के अनन्त रंगों, शांति सकारात्मकता और मानसिक स्वास्थ्य का मर्म अमृत की ओर कविता में समाहित कर दिया था. 

 दैनिक जागरण की पताका राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय फलक तक फहराने वाले यशस्वी संपादक नरेंद्र मोहन के यह उद्गार आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जेन जी से लेकर भौतिकता की दौड़ में तनाव व अवसादग्रस्त हो रहे हर व्यक्ति तक हर किसी के लिए मानसिक स्वास्थ्य के मूलमंत्र सरीखे हैं। 

नरेंद्र मोहन जन्म दिवस पर जागरण एजूकेशन फाउंडेशन की ओर से पांच दिवसीय "अंतस् अग्नि" कार्यक्रम के शुभारंभ और विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के समेकित समारोह में उपस्थित गणमान्य वक्ताओं व विद्वानों ने इसी भाव में कवि हृदय जनसंचारक पत्रकार नरेंद्र मोहन को याद किया। नरेंद्र मोहन जी के सानिध्य में लंबे समय तक पत्रकारिता और संवाद का ककहरा सीखने वाले शिक्षाविद डॉ रमेश वर्मा ने कहा कि नरेंद्र मोहन जी के व्यक्तित्व और कृतित्व से आधुनिक पीढी को परिचित कराने के लिए विचार प्रवाह जैसे कालम पर आधारित पुस्तक और उनके काव्य संग्रह के पठन पाठन का अवसर स्कूल कालेजों में अवश्य सुलभ कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्व. नरेंद्र मोहन की मूर्ति स्थापना के साथ उनकी स्मृति में सर्वसुलभ स्मारक स्थापित करना कानपुर वासियों का दायित्व है। 

जागरण पत्रकारिता प्रबंधन संस्थान "जिम्सी" के निदेशक डॉ उपेन्द्र अयोध्या ने संस्थान की ओर से नरेंद्र मोहन जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर बनी  फिल्म के माध्यम से उनके बारे में राजनीतिज्ञों व पत्रकारो के विचारों से अवगत करिया। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ आराधना गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य के संकेतों और अवसाद व तनाव के कारण सिर से लेकर गर्दन कंधों में दर्द तक की व्याख्या की। जागरण एजूकेशन फाउंडेशन के सीईओ डॉ जेएन गुप्त, पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव, जागरण इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट की डायरेक्टर डॉ दिव्या चौधरी, डीन डॉ अनिल सिंह, जागरण इंस्टीट्यूट आफ डिजिटल एनिमेशन के निदेशक अमरदीप सिंह, सुश्री शेफाली, धीरज शर्मा, डॉ संजय चंदानी, रामजी बाजपेई, आकृति अवस्थी, भव्या खन्ना, दीपक नेगी आदि ने नरेंद्र मोहन जी को याद किया। कार्यक्रम का संचालन छवि तिवारी, आकांक्षा ने किया और काव्य प्रस्तुति के माध्यम से हिमांशु व शिवांसु ने हाईलाइट किया कि नरेंद्र मोहन जी और उनके छोटे भाई योगेंद् मोहन जी की कविताएं सकारात्मक ऊर्जा को सतत प्रज्जवलित बनाए रखने वाली अंतस् अग्नि सरीखी हैं।



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