एनसीईआरटी शुरू करेगा नया डिप्लोमा कोर्स, शिक्षकों को मिलेगी काउंसलिंग की ट्रेनिंग; इन तीन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस


 NCERT Counselling Diploma Course: शिक्षकों को अब केवल पढ़ाने ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक समस्याओं को समझने के लिए भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। अमर उजाला की खबर के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए एक वर्षीय मार्गदर्शन एवं परामर्श डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की घोषणा की है। यह पाठ्यक्रम वर्ष 2027 से देश के छह शहरों में शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों की समस्याओं की पहचान करने और उन्हें उचित मार्गदर्शन देने के लिए तैयार करना है।

छह शहरों में शुरू होगा पाठ्यक्रम

एनसीईआरटी की योजना के अनुसार, यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम दिल्ली, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु और शिलांग में संचालित किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर 50 सीटें निर्धारित की गई हैं। इस तरह सभी छह केंद्रों पर कुल 300 सीटें उपलब्ध होंगी।

इस पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के अन्य पेशेवरों को मार्गदर्शन एवं परामर्श से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। इससे वे विद्यार्थियों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और उनकी समस्याओं के समाधान में मदद कर पाएंगे।

किन तीन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?

पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

1. शैक्षणिक मार्गदर्शन: विद्यार्थियों को पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों, सीखने की समस्याओं, विषयों के चयन और भविष्य की पढ़ाई से जुड़े फैसलों में सहायता देने का प्रशिक्षण मिलेगा।

2. सामाजिक और भावनात्मक सहयोग: छात्रों में तनाव, आत्मविश्वास की कमी, साथियों के साथ संबंधों में परेशानी और भावनात्मक चुनौतियों को समझने पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों को विद्यार्थियों की बात सुनने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता तक पहुंचाने के तरीके सिखाए जाएंगे।

3. नैतिक विकास और व्यवहार संबंधी मार्गदर्शन: विद्यार्थियों में जिम्मेदारी, अनुशासन, सकारात्मक व्यवहार और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने से संबंधित पहलुओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

स्कूलों में क्यों जरूरी है काउंसलिंग की ट्रेनिंग?

आज विद्यार्थियों को पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर को लेकर असमंजस और सामाजिक संबंधों से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार बच्चे अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाते। ऐसे में प्रशिक्षित शिक्षक उनकी समस्याओं को समय रहते पहचानने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की स्थिति में विशेषज्ञों की सहायता लेना जरूरी होता है। इस लिहाज से शिक्षकों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन और जरूरत के अनुसार पेशेवर मदद उपलब्ध कराने में उपयोगी हो सकता है।

शिक्षकों और विद्यार्थियों को क्या मिलेगा फायदा?

इस पाठ्यक्रम से शिक्षकों की मार्गदर्शन एवं परामर्श संबंधी क्षमताओं को मजबूत करने की उम्मीद है। इससे स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, छात्रों की शैक्षणिक प्रगति और भावनात्मक जरूरतों पर भी अधिक व्यवस्थित ढंग से ध्यान दिया जा सकेगा।

एनसीईआरटी की यह पहल शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को महत्व देने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, पाठ्यक्रम में प्रवेश की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और विस्तृत कार्यक्रम से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद इच्छुक अभ्यर्थियों को उसके अनुसार तैयारी करनी होगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ