सेहत की बात: लाल कृष्ण आडवाणी के सीने में इंफेक्शन, जानिए बुजुर्गों में क्यों बढ़ जाता है खतरा


 Lal Krishna Advani Health Condition: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को 16 अक्टूबर 2026 की शाम सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। 98 वर्षीय आडवाणी की हालत अस्पताल की ओर से स्थिर बताई गई है। उनकी निगरानी की जा रही है और डॉक्टरों की टीम जरूरी जांच व उपचार कर रही है। 

आडवाणी की सेहत से जुड़ी इस खबर के बीच बुजुर्गों में चेस्ट इंफेक्शन के कारणों, लक्षणों और बचाव को समझना जरूरी है। बढ़ती उम्र में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या होता है चेस्ट इंफेक्शन?

चेस्ट इंफेक्शन यानी छाती का संक्रमण श्वसन तंत्र के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। यह संक्रमण फेफड़ों की बड़ी व छोटी वायुमार्ग नलियों या फेफड़ों के ऊतकों में हो सकता है। ब्रोंकाइटिस और निमोनिया इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

यह संक्रमण वायरस या बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। कुछ मामलों में सामान्य सर्दी-खांसी के लक्षणों से शुरुआत होती है, लेकिन संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है। बुजुर्गों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

बुजुर्गों में क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

1. कमजोर होती इम्युनिटी: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया बदल सकती है। इससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

2. पुरानी बीमारियां: डायबिटीज, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक हो सकता है।

3. फेफड़ों की कार्यक्षमता में बदलाव: बढ़ती उम्र के साथ श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता और बलगम को बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे कुछ लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।

4. कम शारीरिक गतिविधि: लंबे समय तक बिस्तर पर रहने या कम सक्रिय रहने वाले बुजुर्गों में फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

चेस्ट इंफेक्शन के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

छाती में संक्रमण होने पर हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण नहीं दिखते। सामान्य संकेतों में शामिल हैं:

  • लगातार खांसी होना।

  • बलगम बनना या उसका रंग बदलना।

  • बुखार या ठंड लगना।

  • सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना।

  • सीने में दर्द या भारीपन।

  • असामान्य थकान और कमजोरी।

बुजुर्गों में कभी-कभी तेज बुखार के बजाय भ्रम, अत्यधिक सुस्ती, भूख कम लगना या अचानक कमजोरी जैसे संकेत भी दिखाई दे सकते हैं।

संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?

बुजुर्गों को हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए और खांसी-जुकाम से पीड़ित लोगों के निकट संपर्क से बचना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू, कोविड-19 और निमोनिया से बचाव के लिए उपयुक्त टीकाकरण कराना भी मददगार हो सकता है।

पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और पुरानी बीमारियों को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि ये वायरल संक्रमण पर काम नहीं करतीं।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि किसी बुजुर्ग को सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में तेज दर्द, होंठों का नीला पड़ना, अचानक भ्रम या अत्यधिक सुस्ती महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। लगातार खांसी, बुखार या बढ़ती कमजोरी होने पर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

ध्यान रखें: समय पर पहचान और उचित उपचार से चेस्ट इंफेक्शन की गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। बुजुर्गों में लक्षण हल्के दिखने पर भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ