पीएम मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का किया उद्घाटन, बोले- युवाओं पर केंद्रित हैं मेरी नीतियां


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के विचारों, आध्यात्मिक शिक्षाओं और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद से वर्ष 1993 में हुई अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं का विकास और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना उनकी नीतियों के केंद्र में है।

स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपने पुराने अनुभव साझा किए। उन्होंने वर्ष 1993 में हुई मुलाकात को याद करते हुए उनके विचारों और व्यक्तित्व के महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामी चिन्मयानंद ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और वेदांत दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उनकी शिक्षाओं ने बड़ी संख्या में लोगों को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन मूल्यों को समझने के लिए प्रेरित किया। चिन्मय मिशन के माध्यम से उनके विचारों को देश-विदेश में पहुंचाया गया। इस तरह के सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

युवाओं को प्राथमिकता देने पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में युवा हैं। किसी भी देश की प्रगति में युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, रचनात्मकता और नए विचारों का अहम योगदान होता है। युवाओं को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्याप्त अवसर मिलने से देश के विकास को गति मिलती है।

भारत जैसे युवा आबादी वाले देश के लिए युवाओं की क्षमता का सही इस्तेमाल करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कौशल विकास, रोजगार, नवाचार, उद्यमिता और तकनीक जैसे क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी देश को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।

भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों पर विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक शिक्षाओं को वैश्विक स्तर पर समझने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

प्रधानमंत्री की इस कार्यक्रम में भागीदारी के दौरान स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी मुलाकात और युवाओं को लेकर उनकी सोच प्रमुख विषय रहे। सम्मेलन ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और युवा शक्ति के महत्व को रेखांकित किया।

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