ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद भी क्यों नहीं होती जिंदगी आसान? ऑन्कोलॉजी फिजियोथेरेपी ऐसे कर सकती है मदद


 ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद भी कई मरीजों के लिए सामान्य जिंदगी में लौटना आसान नहीं होता। सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन के बाद थकान, हाथ या कंधे में जकड़न, दर्द, कमजोरी और हाथ में सूजन जैसी समस्याएं लंबे समय तक परेशान कर सकती हैं। कुछ मरीजों में लिम्फेडेमा यानी शरीर के किसी हिस्से में लसीका द्रव जमा होने के कारण सूजन भी हो सकती है। ऐसे में कैंसर रिहैबिलिटेशन और ऑन्कोलॉजी फिजियोथेरेपी रिकवरी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

सर्जरी के बाद हाथ-कंधे की जकड़न में मदद

ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी के बाद प्रभावित हाथ और कंधे की मूवमेंट कम हो सकती है। कपड़े पहनने, बाल संवारने या हाथ ऊपर उठाने जैसे रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लग सकते हैं। फिजियोथेरेपी में मरीज की स्थिति के अनुसार हल्की स्ट्रेचिंग और रेंज-ऑफ-मोशन एक्सरसाइज कराई जाती हैं, जिससे धीरे-धीरे हाथ और कंधे की गतिशीलता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

लिम्फेडेमा में भी हो सकती है उपयोगी

कैंसर के इलाज के बाद कुछ लोगों में हाथ या आसपास के हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। लिम्फेडेमा के प्रबंधन में एक्सरसाइज, कम्प्रेशन और प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा मैनुअल लिम्फ ड्रेनेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक्सरसाइज मांसपेशियों की गतिविधि के जरिए लसीका प्रवाह को सपोर्ट कर सकती है।

हालांकि, हर मरीज के लिए एक जैसा व्यायाम सही नहीं होता। खासकर अगर हाथ में नई या बढ़ती हुई सूजन, दर्द, भारीपन या असामान्य महसूस हो तो फिजियोथेरेपिस्ट और कैंसर-केयर टीम से सलाह लेना जरूरी है।

कमजोरी और थकान से उबरने में मदद

कैंसर के इलाज के दौरान और उसके बाद शारीरिक सक्रियता कम होने से मांसपेशियों की ताकत और फिटनेस प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, उचित तरीके से किया गया एरोबिक और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज कार्यक्रम थकान कम करने, शारीरिक क्षमता और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकता है।

फिजियोथेरेपी कब और कैसे शुरू करें?

ऑन्कोलॉजी फिजियोथेरेपी का कार्यक्रम मरीज की सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, वर्तमान लक्षण और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इसलिए बिना सलाह के कठिन एक्सरसाइज या भारी वजन उठाने की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। इलाज कर रही मेडिकल टीम से अनुमति लेकर प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाना बेहतर रहता है।

ब्रेस्ट कैंसर का इलाज खत्म होना रिकवरी का अंत नहीं, बल्कि कई मरीजों के लिए सामान्य जीवन की ओर लौटने की शुरुआत होती है। सही रिहैबिलिटेशन से शरीर की ताकत, मूवमेंट और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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