BRICS Summit: भारत में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश के शामिल नहीं होने के फैसले को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में भाग लेने से बांग्लादेश को आर्थिक और सामाजिक विकास के नए अवसर मिल सकते थे। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी से देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने, व्यापारिक संभावनाएं तलाशने और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।
शेख हसीना ने विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके बयान ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों तथा क्षेत्रीय सहयोग को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने से क्या हो सकता था फायदा?
ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश और विकास से जुड़े मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देना है। ऐसे मंचों पर भागीदारी से देशों को दूसरे देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने और नए सहयोग के अवसर तलाशने का मौका मिल सकता है।
शेख हसीना के बयान के मुताबिक, ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश की भागीदारी से देश को आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में लाभ मिल सकता था। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं से जुड़े अवसरों पर बातचीत की संभावना भी बन सकती थी।
हालांकि, किसी सम्मेलन में शामिल होने भर से आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं होती। वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित देश बातचीत को किस तरह ठोस समझौतों और परियोजनाओं में बदलते हैं।
विदेश नीति में राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की बात
शेख हसीना ने विदेश नीति से जुड़े निर्णयों में राष्ट्रीय हित को केंद्र में रखने की आवश्यकता बताई। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े फैसले लेते समय देश के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक हितों को ध्यान में रखना चाहिए।
विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण होता है। क्षेत्रीय सहयोग, व्यापारिक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी से देशों को अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से क्यों अहम है यह बयान?
भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग रहा है। दोनों देशों के संबंधों का असर क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।
ऐसे में ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर दिया गया बयान क्षेत्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, इस बयान के आधार पर दोनों देशों के मौजूदा संबंधों की स्थिति या भविष्य की दिशा के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
तारिक रहमान के भारत नहीं आने पर उठाए सवाल
पीटीआई को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे अपरिपक्व निर्णय बताते हुए कहा कि इससे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा। भारत ने तारिक रहमान को बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ था।
हसीना ने सवाल उठाया कि क्या उनके दिल्ली में मौजूद होने की वजह से तारिक रहमान ने भारत आने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि दो देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति से जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलता के आधार पर तय नहीं होने चाहिए।
बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर भी बोलीं हसीना
पूर्व प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश के राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए लोकतंत्र, मतदान के अधिकार और कानून के शासन को बहाल करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य तय करने का अधिकार वहां की जनता को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से मिलना चाहिए। ये शेख हसीना के अपने बयान और दावे हैं।
उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि बांग्लादेश को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना चाहिए और भारत समेत अन्य देशों के साथ सहयोग के अवसरों का इस्तेमाल राष्ट्रीय विकास के लिए करना चाहिए।
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