भारत में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का बोझ लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। 2026 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में भारत के 50 अध्ययनों और 64.79 लाख से अधिक वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें हाई ब्लड प्रेशर की संयुक्त व्यापकता 34.84 प्रतिशत और डायबिटीज की 15.37 प्रतिशत पाई गई। वहीं, दोनों स्थितियों के साथ मौजूद होने की संयुक्त व्यापकता 46.13 प्रतिशत आंकी गई।
एक साथ क्यों बढ़ जाती है चिंता?
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज अलग-अलग भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थितियां हैं, लेकिन जब दोनों एक व्यक्ति में मौजूद हों तो इलाज और लंबे समय तक बीमारी को नियंत्रित रखना अधिक जटिल हो सकता है। समीक्षा में बताया गया है कि इन दोनों बीमारियों का साथ होना हृदय संबंधी बीमारी, किडनी से जुड़ी जटिलताओं और समय से पहले मृत्यु के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है।
डायबिटीज में लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं और शरीर के दूसरे अंगों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं और हृदय पर लगातार दबाव डालता है। दोनों स्थितियां साथ होने पर मरीज को नियमित जांच, दवाओं और जीवनशैली में बदलाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
उम्र बढ़ने के साथ डायबिटीज और हाई बीपी का खतरा बढ़ सकता है। 2026 में प्रकाशित एक अन्य भारतीय अध्ययन में 56 हजार से अधिक लोगों के स्वास्थ्य जांच संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें दोनों बीमारियों के साथ मौजूद होने की दर करीब 5 प्रतिशत थी और दोनों स्थितियों के बीच संबंध उम्र बढ़ने के साथ अधिक स्पष्ट दिखाई दिया। अध्ययन में करीब 40 वर्ष की उम्र के आसपास संयुक्त जोखिम में तेजी से वृद्धि देखी गई।
बचाव के लिए क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज या हाई बीपी है तो नियमित रूप से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच कराना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और धूम्रपान से बचना जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों के लिए चुनौती सिर्फ बीमारी का पता लगाना नहीं, बल्कि लंबे समय तक उसका नियंत्रण बनाए रखना भी है। 2026 की समीक्षा ने भी डायबिटीज और हाई बीपी के लिए एकीकृत स्क्रीनिंग और प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया है।
ध्यान रखें कि किसी व्यक्ति का वास्तविक जोखिम उसकी उम्र, वजन, पारिवारिक इतिहास, अन्य बीमारियों और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है। इसलिए अगर ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहता है, तो डॉक्टर से जांच और उचित उपचार की सलाह लेना बेहतर है।
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