'सरकार माई-बाप नहीं': यूपीएससी शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने बताया- किस आधार पर हों सिविल सेवा में भर्तियां


 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने यूपीएससी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि समय और पीढ़ियां बदलने के बावजूद देश में इस संस्था के प्रति लोगों का भरोसा कायम है। यूपीएससी की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी और अब यह देश की एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने सिविल सेवाओं में भर्ती की प्रक्रिया में योग्यता, निष्पक्षता और समान अवसर के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा में आने वाले लोगों का चयन किसी सिफारिश या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर होना चाहिए। यूपीएससी की पूरी यात्रा भी इसी योग्यता आधारित चयन व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ी रही है।

पीएम मोदी ने सरकार की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि सरकार को नागरिकों के जीवन में ‘माई-बाप’ की भूमिका निभाने के बजाय उन्हें सक्षम बनाने वाली व्यवस्था के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन में नागरिकों के प्रति सेवा भावना, पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि सिविल सेवक केवल सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं होते, बल्कि उनका सीधा संबंध आम लोगों की जिंदगी से होता है। इसलिए अधिकारियों के निर्णय और उनका व्यवहार नागरिकों के अनुभव को प्रभावित करते हैं। ऐसे में प्रशासन में संवेदनशीलता, ईमानदारी और जिम्मेदारी जरूरी है।

यूपीएससी के शताब्दी समारोह में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और यूपीएससी के अधिकारी भी शामिल हुए। यह कार्यक्रम 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय शताब्दी समारोह का हिस्सा है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने यूपीएससी शताब्दी स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। इसके अलावा ‘100 Landmark Judgements – Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह समारोह पिछले वर्ष 1 अक्टूबर से शुरू हुए यूपीएससी के सालभर चलने वाले शताब्दी समारोह का समापन है।

यूपीएससी ने अपने 100 साल के सफर में देश के प्रशासन के लिए बड़ी संख्या में अधिकारियों का चयन किया है। संस्था की शताब्दी का अवसर न केवल उसके ऐतिहासिक सफर को याद करने का मौका है, बल्कि बदलती प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप भविष्य की सिविल सेवाओं को तैयार करने पर भी चर्चा का अवसर बना है।

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