साइबर अलर्ट: 99% डिस्काउंट के चक्कर में खाली हो सकता है बैंक खाता, ऐसे पहचानें नकली शॉपिंग वेबसाइट


 त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बढ़ जाता है। दिवाली और फेस्टिव सेल के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के ऑफर और डिस्काउंट देती हैं। लेकिन इसी मौके का फायदा साइबर ठग भी उठाते हैं। वे नकली वेबसाइट, फर्जी विज्ञापन और लुभावने ऑफर के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। कई बार 90 से 99 प्रतिशत तक छूट देने का दावा किया जाता है, ताकि ग्राहक बिना जांच-पड़ताल किए खरीदारी कर लें। ऐसे में जरूरी है कि ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सावधानी बरती जाए और असली तथा नकली वेबसाइट के बीच अंतर पहचानना सीखा जाए।

99 प्रतिशत डिस्काउंट के पीछे कैसे होता है साइबर फ्रॉड?

साइबर अपराधी लोकप्रिय ब्रांड और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार कर सकते हैं। इन वेबसाइटों पर मोबाइल, लैपटॉप, कपड़े, जूते और घरेलू सामान बेहद कम कीमत पर बेचने का दावा किया जाता है।

ग्राहक ऑफर देखकर वेबसाइट पर पहुंचते हैं और जल्दबाजी में ऑर्डर कर देते हैं। कुछ मामलों में भुगतान लेने के बाद सामान नहीं भेजा जाता, जबकि अन्य मामलों में ग्राहकों की निजी या बैंकिंग जानकारी चुराने की कोशिश की जाती है।

ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों, मैसेजिंग ऐप और ईमेल के जरिए भी फर्जी सेल के लिंक फैलाते हैं। इसलिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके सीधे भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है।

नकली शॉपिंग वेबसाइट की पहचान कैसे करें?

1. वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें

ऑनलाइन खरीदारी से पहले वेबसाइट के पते को ध्यान से देखें। ठग असली वेबसाइट से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी अक्षर की गलती या अतिरिक्त शब्द पर ध्यान दें। केवल वेबसाइट पर HTTPS या ताले का निशान देखकर उसे पूरी तरह सुरक्षित न मानें।

2. जरूरत से ज्यादा सस्ते ऑफर से सावधान रहें

अगर किसी महंगे स्मार्टफोन या ब्रांडेड उत्पाद पर 99 प्रतिशत छूट मिल रही है, तो पहले उसकी वास्तविक कीमत और दूसरे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑफर की जांच करें। असामान्य रूप से कम कीमत धोखाधड़ी का संकेत हो सकती है।

3. संपर्क और रिटर्न की जानकारी देखें

विश्वसनीय ऑनलाइन स्टोर पर आमतौर पर कंपनी की जानकारी, ग्राहक सहायता, रिटर्न पॉलिसी और भुगतान से संबंधित शर्तें उपलब्ध होती हैं। इन जानकारियों का न होना या अस्पष्ट होना संदेह पैदा कर सकता है।

4. रिव्यू और रेटिंग की जांच करें

खरीदारी से पहले वेबसाइट और उत्पाद के बारे में स्वतंत्र स्रोतों पर उपलब्ध समीक्षाएं देखें। केवल वेबसाइट पर दिखाई देने वाली पांच सितारा रेटिंग पर भरोसा न करें, क्योंकि फर्जी समीक्षाएं भी हो सकती हैं।

5. भुगतान करते समय बरतें सावधानी

अनजान वेबसाइट पर कार्ड की जानकारी, बैंकिंग पासवर्ड या OTP साझा न करें। भुगतान के नाम पर आए संदिग्ध लिंक से बचें और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।

ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

  • खरीदारी के लिए वेबसाइट का पता खुद टाइप करें या आधिकारिक ऐप का इस्तेमाल करें।

  • सोशल मीडिया पर मिले ऑफर की पुष्टि कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म से करें।

  • भुगतान से पहले वेबसाइट का नाम, कीमत और ऑर्डर की शर्तें जांचें।

  • बैंक खाते और कार्ड से जुड़े मैसेज पर नजर रखें।

  • ऑनलाइन भुगतान के लिए उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल करें।

साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?

अगर आपने किसी संदिग्ध वेबसाइट पर भुगतान कर दिया है या आपको लगता है कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से संपर्क करें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल किया जा सकता है। आप आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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