देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश में तैयार 93 दवाओं समेत देशभर की कुल 330 दवाओं के सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। जांच में इन दवाओं के नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद दवा निर्माण कंपनियों और संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, आम लोगों के मन में भी यह चिंता है कि कहीं वे अनजाने में इन दवाओं का सेवन तो नहीं कर रहे हैं।
हिमाचल में बनी 93 दवाओं के सैंपल फेल
हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख दवा निर्माण केंद्रों में शामिल है। यहां कई कंपनियां अलग-अलग बीमारियों के उपचार के लिए दवाओं का उत्पादन करती हैं। ऐसे में प्रदेश में निर्मित 93 दवाओं के सैंपल का गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरना गंभीर मामला है। दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
ड्रग अलर्ट में शामिल दवाओं के नमूनों की जांच के दौरान निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नहीं मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रत्येक दवा का नाम, उसका बैच नंबर और संबंधित निर्माता की जानकारी के आधार पर ही यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सी दवा जांच में विफल रही है।
देशभर में 330 दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे
हिमाचल प्रदेश के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार दवाओं के सैंपल भी जांच में फेल पाए गए हैं। कुल 330 दवाओं के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस तरह के मामलों में संबंधित दवा कंपनियों से जवाब मांगा जा सकता है और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
दवाओं की गुणवत्ता में कमी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की ओर से बाजार में उपलब्ध स्टॉक को वापस मंगाने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवाएं मरीजों तक न पहुंचें।
बाजार से वापस मंगाया जाएगा स्टॉक
इस मामले में संबंधित विभाग बाजार में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक को वापस मंगाने की कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही विभाग अपने स्तर पर भी इन दवाओं के नमूनों की जांच कराएगा, ताकि गुणवत्ता से जुड़ी स्थिति की पुष्टि की जा सके। जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं।
मरीज कैसे रखें अपनी सेहत का ध्यान?
दवाओं के सैंपल फेल होने की खबर के बाद मरीजों को घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से दवा ले रहा है, तो उसे दवा का नाम, निर्माता और बैच नंबर ड्रग अलर्ट में दी गई जानकारी से मिलाना चाहिए। किसी दवा के अलर्ट में शामिल होने की पुष्टि होने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
ध्यान रखें: डॉक्टर की सलाह के बिना नियमित रूप से ली जा रही दवा को अचानक बंद न करें और न ही उसके स्थान पर कोई दूसरी दवा शुरू करें। दवा की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित स्वास्थ्य विभाग या चिकित्सक से संपर्क करना बेहतर है।

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