Mental Health Problems In India: भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन परेशानी होने पर विशेषज्ञ से मदद लेने में अब भी काफी देर की जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता अमाहा (Amaha) की मेंटल हेल्थ रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, सर्वे में शामिल 53 प्रतिशत लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं शुरू होने के एक साल से अधिक समय बाद पेशेवर मदद ली। वहीं, 56.2 प्रतिशत लोगों ने बताया कि इलाज शुरू करने से पहले उनके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आए थे। छात्रों में यह आंकड़ा 71.7 प्रतिशत रहा।
13,825 लोगों के जवाबों पर आधारित है रिपोर्ट
The Amaha Mental Health Report 2026: Understanding the Journey to Care in India के लिए अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच 13,825 लोगों के जवाबों का विश्लेषण किया गया। ये वे लोग थे, जिन्होंने अमाहा से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता लेने से पहले अपनी परेशानियों और अनुभवों के बारे में जानकारी दी थी।
रिपोर्ट में सामने आया कि केवल 11.3 प्रतिशत लोगों ने परेशानी शुरू होने के एक महीने के भीतर पेशेवर मदद ली। इससे पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या महसूस होने और उपचार शुरू करने के बीच लंबा अंतर हो सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिपोर्ट के आंकड़े अमाहा से मदद लेने वाले लोगों पर आधारित हैं। इन्हें भारत की पूरी आबादी या सभी छात्रों की स्थिति का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
छात्रों में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करने से पहले खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात अलग-अलग समूहों के लोगों ने बताई।
छात्र: 71.7 प्रतिशत
बेरोजगार लोग: 64.7 प्रतिशत
कामकाजी पेशेवर: 53.2 प्रतिशत
सभी प्रतिभागी: 56.2 प्रतिशत
विशेषज्ञों के मुताबिक, पढ़ाई का दबाव और करियर को लेकर अनिश्चितता मानसिक तनाव में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इसके पीछे बुलिंग, रिश्तों में समस्याएं, आर्थिक असुरक्षा और अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां भी हो सकती हैं। इसलिए किसी एक कारण को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।
चिंता, तनाव और उदासी सबसे आम परेशानियां
रिपोर्ट में शामिल लोगों ने एक साथ कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने की बात कही। करीब 94.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने दो या उससे अधिक परेशानियां बताईं।
इनमें सबसे आम समस्याएं थीं:
चिंता (एंग्जायटी): 72.1 प्रतिशत
तनाव (स्ट्रेस): 67.5 प्रतिशत
लगातार उदासी या मन खराब रहना: 58.3 प्रतिशत
रिश्तों से जुड़ी परेशानियां: 55.6 प्रतिशत
मूड में बार-बार बदलाव: 54.1 प्रतिशत
लगातार बनी रहने वाली मानसिक परेशानियां व्यक्ति की पढ़ाई, काम, रिश्तों और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इनके लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
लोग मदद लेने में देरी क्यों करते हैं?
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात न कर पाना, सामाजिक झिझक, लक्षणों को पहचानने में कठिनाई और इलाज तक पहुंचने में आने वाली बाधाएं मदद लेने में देरी की वजह बन सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 54.5 प्रतिशत लोगों ने विशेषज्ञ से संपर्क करने से पहले दोस्तों या परिवार से बात की, जबकि 44.6 प्रतिशत ने खुद ही परेशानी संभालने की कोशिश की। कुछ लोगों ने अत्यधिक स्क्रीन टाइम, जरूरत से ज्यादा सोने या काम में खुद को व्यस्त रखने जैसे तरीकों का सहारा भी लिया।
परिवार और दोस्तों का सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन लगातार चिंता, तनाव, उदासी या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय पर मदद लेना जरूरी
मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी कमजोरी नहीं है और इसके लिए मदद मांगने में शर्म महसूस करने की जरूरत नहीं है। परिवार, स्कूल-कॉलेज और कार्यस्थल पर ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जहां लोग बिना डर के अपनी समस्या साझा कर सकें।
यदि किसी व्यक्ति के मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हों, तो उसे अकेला न छोड़ें और जल्द से जल्द मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल से सहायता लें। तत्काल खतरे की स्थिति में भारत में आपातकालीन नंबर 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
समय पर सहायता मिलने से समस्या को समझने, सही उपचार पाने और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
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