Hindu Population in Pakistan: पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की आबादी और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में ब्रिटेन की संसद में पेश एक रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति, उनके साथ होने वाले भेदभाव और धार्मिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभाजन से पहले जिस क्षेत्र में आज पाकिस्तान है, वहां हिंदुओं की आबादी का अनुपात काफी अधिक था। लेकिन विभाजन, बड़े पैमाने पर पलायन और दशकों से जारी सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनकी जनसंख्या हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव आया।
1941 में 14.6% थी हिंदुओं की आबादी
रिपोर्ट के मुताबिक, 1941 की जनगणना में उस क्षेत्र की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 14.6 प्रतिशत थी, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बना। 1947 में भारत के विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। इसके चलते लाखों हिंदू और सिख परिवार पाकिस्तान से भारत की ओर पलायन कर गए।
इस पलायन का पाकिस्तान में धार्मिक जनसंख्या के अनुपात पर बड़ा असर पड़ा। हालांकि, इस बदलाव को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। विभाजन के बाद के प्रवासन, जनसंख्या वृद्धि और जनगणना की पद्धतियों को भी समझना जरूरी है।
2023 की जनगणना में क्या है हिंदुओं की स्थिति?
पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, देश में हिंदू जति समुदाय के 38.67 लाख से अधिक लोग दर्ज किए गए। यह कुल आबादी का लगभग 1.61 प्रतिशत है। वहीं, अनुसूचित जातियों के रूप में अलग दर्ज 13.49 लाख लोगों को भी शामिल किया जाए तो यह संख्या लगभग 52.17 लाख यानी 2.17 प्रतिशत हो जाती है।
इसलिए पाकिस्तान में हिंदुओं की हिस्सेदारी 1.7 प्रतिशत बताने के बजाय जनगणना की श्रेणियों का अंतर समझना जरूरी है।
पाकिस्तान में कहां रहते हैं सबसे ज्यादा हिंदू?
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी आबादी सिंध प्रांत में रहती है। यहां हिंदू जति और अनुसूचित जातियों को मिलाकर करीब 49 लाख लोग दर्ज किए गए हैं। थारपारकर और सांघड़ जैसे जिलों में हिंदू समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है।
इस्लामाबाद में मंदिर को लेकर क्यों है चर्चा?
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के धार्मिक अधिकारों को लेकर भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ब्रिटेन की संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर के निर्माण की योजना को 2020 में विरोध का सामना करना पड़ा था। निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजधानी में हिंदू समुदाय के लिए पूजा स्थल की कमी है।
क्या धार्मिक भेदभाव भी है आबादी घटने की वजह?
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को लेकर धार्मिक भेदभाव, जबरन धर्म परिवर्तन, नाबालिग लड़कियों के अपहरण और संपत्ति से जुड़े विवादों की शिकायतें सामने आती रही हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई है।
हालांकि, जनसंख्या के आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि आबादी में बदलाव किसी सुनियोजित सरकारी नीति के कारण हुआ। इसके लिए ऐतिहासिक प्रवासन, विभाजन, जनसंख्या वृद्धि और अल्पसंख्यकों की सामाजिक स्थिति जैसे सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।
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