12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की आज से शुरुआत, 21 देशों के प्रतिनिधि जुटे; पीएम मोदी से होगी मुलाकात


 नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में आज नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की शुरुआत हो रही है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक में 21 देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। मंच के दौरान विभिन्न देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करने, वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने और आपसी संबंधों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी अहम भूमिका रहेगी। वह विभिन्न देशों के संसद अध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों के दौरान भारत और दूसरे देशों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

ओम बिरला करेंगे उद्घाटन

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। इस बैठक में शामिल होने के लिए विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। भारत की मेजबानी में आयोजित इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसदीय संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग के साथ-साथ संसदीय स्तर पर संवाद भी इस मंच का अहम हिस्सा है। इस तरह की बैठकों में सदस्य देशों को अपने अनुभव साझा करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।

वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्देश्य सदस्य और साझेदार देशों के बीच आपसी समझ तथा सहयोग को आगे बढ़ाना है। बैठक में वैश्विक परिस्थितियों, विकास संबंधी प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है। इसके अलावा, संसदों के बीच संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान के जरिए साझा चुनौतियों का समाधान तलाशने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

इस आयोजन में 21 देशों की भागीदारी भारत के लिए कूटनीतिक और संसदीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से प्रस्तावित मुलाकातें भी इसी लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

भारत की मेजबानी में हो रहा यह मंच ब्रिक्स देशों और उनके साझेदारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। इससे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को आपसी सहयोग बढ़ाने, विचार साझा करने और भविष्य में मिलकर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

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