इंटेल से TSMC और अब AI तक, सेमीकंडक्टर की अगली रेस में भारत के लिए क्या हैं मौके?


 सेमीकंडक्टर उद्योग पिछले कुछ दशकों में बड़े बदलावों से गुजरा है। कभी चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री तक पूरी वैल्यू चेन पर कुछ चुनिंदा कंपनियों का दबदबा था। इंटेल इसी मॉडल की सबसे बड़ी मिसाल रही। इसके बाद ताइवान की TSMC ने फाउंड्री मॉडल को मजबूती देकर सेमीकंडक्टर उद्योग की संरचना को काफी हद तक बदल दिया। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने चिप इंडस्ट्री के सामने एक नया बाजार और नई तकनीकी जरूरतें खड़ी कर दी हैं।

इसी बदलते दौर में भारत अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सेमीकॉन इंडिया 2026 के मंच पर इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ति राय ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत के लिए उभरते अवसरों पर बात की। उन्होंने बताया कि वैश्विक चिप उद्योग किस तरह बदल रहा है और इस बदलाव में भारत के लिए किन क्षेत्रों में संभावनाएं बन सकती हैं।

इंटेल से फाउंड्री मॉडल तक बदली तस्वीर

सेमीकंडक्टर उद्योग में लंबे समय तक इंटेल जैसी कंपनियां डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग दोनों क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में थीं। लेकिन फाउंड्री मॉडल के विस्तार ने कंपनियों को चिप डिजाइन और चिप निर्माण की प्रक्रियाओं को अलग-अलग करने का अवसर दिया। TSMC ने इसी मॉडल को बड़े पैमाने पर विकसित किया और दुनिया की कई प्रमुख टेक कंपनियों के लिए चिप निर्माण की भूमिका निभाई।

इस बदलाव ने वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया। अब चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अन्य प्रक्रियाओं में अलग-अलग देशों और कंपनियों की भूमिका हो सकती है।

AI ने बढ़ाई एडवांस चिप्स की मांग

AI के विस्तार के साथ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और एडवांस सेमीकंडक्टर की जरूरत तेजी से बढ़ी है। डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्रियल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में चिप्स की मांग बढ़ रही है।

AI सिस्टम को बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस करने के लिए शक्तिशाली प्रोसेसर और मेमोरी की जरूरत होती है। इसके साथ ही चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसी तकनीकों का महत्व भी बढ़ा है। यही क्षेत्र भारत के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं।

भारत के लिए क्या है अवसर?

भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर डिजाइन और इंजीनियरिंग टैलेंट के लिए जाना जाता है। अब देश चिप मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसी गतिविधियों में भी अपनी क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

निवृत्ति राय के मुताबिक, भारत के लिए केवल चिप फैक्ट्री स्थापित करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी भूमिका बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। डिजाइन, रिसर्च, पैकेजिंग, टेस्टिंग, सप्लाई चेन और कुशल मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में विस्तार से भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है।

सेमीकॉन इंडिया 2026 जैसे मंचों पर वैश्विक कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। AI के दौर में सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ने के बीच भारत के सामने वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनने और अपनी घरेलू क्षमता विकसित करने का अवसर है।

हालांकि, इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी काफी कड़ी है। अत्याधुनिक तकनीक, बड़े निवेश, कुशल कर्मचारियों, भरोसेमंद सप्लाई चेन और लंबे समय की निरंतरता की जरूरत होगी। ऐसे में भारत की अगली चुनौती केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को व्यापक और प्रतिस्पर्धी बनाना होगी।

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