Sonam Wangchuk Hunger Strike: किस वजह से अनशन कर रहे थे सोनम वांगचुक? कब हुई शुरुआत और अब तक क्या-क्या हुआ


 प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर अपने आंदोलन को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में आमरण अनशन शुरू किया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी केंद्र और दिल्ली सरकार को नियमित स्वास्थ्य निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

क्यों शुरू किया अनशन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनम वांगचुक ने 28 जून से अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर है। हाल के परीक्षा पेपर लीक मामलों और शिक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई है। इस आंदोलन में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

हालांकि, सोनम वांगचुक पहले भी लद्दाख से जुड़े मुद्दों—जैसे पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्र की स्वायत्तता और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा—को लेकर कई बार भूख हड़ताल कर चुके हैं। वर्ष 2024 में भी उन्होंने लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर 21 दिन का "क्लाइमेट फास्ट" किया था।

अब तक क्या-क्या हुआ?

  • अनशन शुरू होने के बाद देशभर से छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई राजनीतिक नेताओं ने उनका समर्थन किया।
  • उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई और रिपोर्ट्स के अनुसार उनका वजन काफी कम हो गया है। स्वास्थ्य संकेतकों में भी गिरावट दर्ज की गई।
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए सरकार को नियमित मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए।
  • 21वें दिन उनकी तबीयत अधिक खराब होने पर पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई को लेकर समर्थकों ने विरोध भी जताया।
  • इस आंदोलन ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा पैदा की और बड़ी संख्या में लोगों ने उनके समर्थन में पोस्ट किए।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और शिक्षा सुधारक हैं। उन्हें आइस स्तूप (Ice Stupa) जैसी पर्यावरणीय पहल और वैकल्पिक शिक्षा मॉडल विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। उनकी प्रेरणादायक जीवन यात्रा को लेकर अक्सर फिल्म '3 इडियट्स' के किरदार फुनसुख वांगड़ू से भी जोड़ा जाता है, हालांकि फिल्म निर्माताओं ने इसे प्रत्यक्ष रूप से उन पर आधारित नहीं बताया है।

सोनम वांगचुक का यह अनशन केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने का प्रयास माना जा रहा है।

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