SGLT2 Inhibitors Side Effects: टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली SGLT2 इनहिबिटर दवाओं को लेकर नई रिसर्च ने कुछ मरीजों के लिए सावधानी की जरूरत बताई है। अध्ययन में पाया गया कि इन दवाओं के इस्तेमाल के दौरान डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) का जोखिम कुछ विशेष परिस्थितियों वाले मरीजों में बढ़ सकता है। यह एक गंभीर मेटाबॉलिक स्थिति है, जिसका समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकती है।
क्या है SGLT2 इनहिबिटर?
SGLT2 इनहिबिटर दवाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। ये दवाएं किडनी के जरिए अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकालने में मदद करती हैं।
हालांकि, इन दवाओं के फायदे केवल ब्लड शुगर नियंत्रण तक सीमित नहीं हैं। कई SGLT2 दवाओं को हृदय और किडनी से जुड़े लाभों के कारण भी इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए नई रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि हर मरीज को इन दवाओं से बचना चाहिए।
किन मरीजों में ज्यादा खतरा?
नई स्टडी में स्वीडन, डेनमार्क और नॉर्वे के राष्ट्रीय स्वास्थ्य रजिस्टरों से 2.8 लाख से अधिक टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले कीटोएसिडोसिस हो चुका हो, ब्लड शुगर ज्यादा रहता हो, शरीर का वजन कम हो या कुपोषण के संकेत हों, ऐसे मरीजों में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक था।
शोध में संक्रमण को भी कीटोएसिडोसिस को ट्रिगर करने वाली सामान्य परिस्थितियों में शामिल पाया गया।
क्या है डायबिटिक कीटोएसिडोसिस?
कीटोएसिडोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण बड़ी मात्रा में कीटोन बनने लगते हैं। इससे शरीर का एसिड-बेस संतुलन बिगड़ सकता है। इसके लक्षणों में मतली, उल्टी, पेट दर्द, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकती है।
खास बात यह है कि SGLT2 दवाओं से जुड़ा कीटोएसिडोसिस कभी-कभी बहुत ज्यादा ब्लड शुगर के बिना भी हो सकता है। FDA ने भी SGLT2 इनहिबिटर्स के लेबल में कीटोएसिडोसिस को लेकर चेतावनी दी है।
क्या मरीज दवा लेना बंद कर दें?
नहीं। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना SGLT2 इनहिबिटर बंद नहीं करनी चाहिए। नई रिसर्च का उद्देश्य जोखिम वाले मरीजों की पहचान करना और डॉक्टरों को दवा लिखने से पहले उनकी मेडिकल हिस्ट्री पर ध्यान देने की जरूरत बताना है।
यदि दवा लेने के दौरान उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है। खासकर जिन मरीजों को पहले कीटोएसिडोसिस हो चुका है या जो लंबे समय तक भूखे रहते हैं, डिहाइड्रेशन का शिकार हैं अथवा बहुत कम कार्बोहाइड्रेट वाला आहार लेते हैं, उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत हो सकती है
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