प्लास्टिक कचरा बड़ी चुनौती, PM मोदी ने गिनाए पर्यावरण संरक्षण के भारत के प्रयास


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का विषय ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक कचरे, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत के प्रयासों को रेखांकित किया।

प्लास्टिक कचरे को बताया बड़ी चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने बताया कि भारत ने इस समस्या से निपटने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के साथ ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ के सिद्धांत को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कचरे के पुनर्चक्रण और सर्कुलर इकोनॉमी को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने गोबरधन योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए गांवों में गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने की कोशिश की जा रही है। इससे कचरा प्रबंधन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है।

सौर ऊर्जा पर भारत का जोर

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने पर्यावरण से जुड़े कई क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 2 गीगावाट से बढ़कर अब 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।

उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 50 लाख से ज्यादा घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पवन ऊर्जा, जल विद्युत और गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में हुई वृद्धि को भी भारत की पर्यावरणीय पहल से जोड़ा।

स्वच्छ परिवहन और हाइड्रोजन पर फोकस

प्रधानमंत्री ने क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन को भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र करते हुए इसे स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक नई शुरुआत बताया। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री और रेलवे के विद्युतीकरण को भी उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर पेश किया।

जलवायु कार्रवाई में भारत की भूमिका

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का विकास तेज होने के साथ टिकाऊ भी है। उन्होंने प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित और विकासशील देशों के बीच सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल विकास को भी जरूरी बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

NGT का यह दो दिवसीय सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इसमें पर्यावरण विशेषज्ञों के अलावा भारत और 17 अन्य देशों के न्यायिक प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में पर्यावरणीय चुनौतियों, नीतियों और पर्यावरण शासन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

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