PM Modi Gen Z Connect: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में युवाओं के साथ संवाद के लिए एक अलग अंदाज अपनाया। कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए विशाल मंच और रैंप पर पीएम मोदी का युवाओं से सीधा संवाद खास चर्चा में रहा। इस आयोजन को पारंपरिक राजनीतिक रैली से अलग रखा गया, जिसमें Gen Z को केंद्र में रखकर माहौल तैयार किया गया था।
जंतर-मंतर के बाद बदला राजनीतिक अंदाज?
2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen Z आंदोलन ने युवाओं के मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया। शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े सवालों को लेकर हुए इस आंदोलन में सोशल मीडिया, मीम्स, संगीत और नए तरह के नारों का जमकर इस्तेमाल हुआ।
आंदोलन के बाद बीजेपी और सरकार की ओर से युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिशें तेज हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी ने सोशल मीडिया पर भी Gen Z की भाषा और पॉप-कल्चर के संदर्भों का इस्तेमाल बढ़ाया है।
'OG', 'धुरंधर' और 'नाराज फूफा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल
पीएम मोदी ने हाल के संबोधनों में युवाओं के बीच लोकप्रिय शब्दों और इंटरनेट कल्चर का इस्तेमाल किया है। उन्होंने 'OG', 'धुरंधर' और 'नाराज फूफा' जैसे शब्दों के जरिए अपने भाषण को पारंपरिक राजनीतिक भाषा से अलग बनाने की कोशिश की। इससे यह संकेत मिलता है कि बीजेपी युवा मतदाताओं से संवाद के लिए अपनी संचार शैली में बदलाव कर रही है।
Y-शेप मंच और 'रॉकस्टार' अंदाज
वडोदरा के कार्यक्रम में पीएम मोदी के लिए तैयार किया गया मंच भी सामान्य राजनीतिक सभाओं से अलग नजर आया। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल पर लंबा रैंप और रेड कार्पेट तैयार किया गया था, जिस पर प्रधानमंत्री युवाओं के बीच चलते हुए उनसे संवाद करने वाले थे। करीब 700 मीटर लंबे रेड कार्पेट मंच का इस्तेमाल युवाओं के साथ सीधे संपर्क के लिए किया गया।
सोशल मीडिया के दौर में मंच, कैमरा एंगल और प्रधानमंत्री की बॉडी लैंग्वेज भी राजनीतिक संचार का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में 'OG वॉक' जैसा अंदाज युवाओं के बीच कितना असर छोड़ता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।
क्या बदल पाएगी Gen Z की राय?
सिर्फ भाषा, मीम्स या मंच के अंदाज से युवाओं का भरोसा जीतना आसान नहीं होगा। जंतर-मंतर आंदोलन ने दिखाया कि Gen Z केवल मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी मुखर है।
इसलिए बीजेपी के सामने चुनौती केवल Gen Z की भाषा बोलने की नहीं, बल्कि उसके मुद्दों पर ठोस जवाब देने की भी है। पीएम मोदी का नया अंदाज निश्चित रूप से राजनीतिक संचार में बदलाव का संकेत है, लेकिन क्या यह बदलाव युवा मतदाताओं के भरोसे में भी बदलेगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी दौर में मिलेगा।
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