Indoor Air Pollution: आमतौर पर जब भी प्रदूषण की बात होती है तो हमारे दिमाग में सड़क, वाहन और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार घर के अंदर की हवा भी प्रदूषित हो सकती है और कुछ परिस्थितियों में इसमें मौजूद प्रदूषकों का स्तर बाहर की हवा से अधिक हो सकता है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के अनुसार, घर के अंदर कुछ प्रदूषकों का स्तर बाहर की तुलना में कई गुना अधिक हो सकता है।
खाना बनाते समय बढ़ सकता है प्रदूषण
रसोई घर के अंदर वायु प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत हो सकती है। खासकर तलने, भूनने या खाना जलने पर हवा में सूक्ष्म कण यानी PM बढ़ सकते हैं। गैस चूल्हे और अन्य ईंधन जलाने वाले उपकरण भी कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक पैदा कर सकते हैं।
इसलिए खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल करना और संभव हो तो उसे बाहर की ओर वेंट करना बेहतर माना जाता है। खाना बनने के बाद कुछ समय तक वेंटिलेशन बनाए रखना भी मददगार हो सकता है।
सफाई और एयर फ्रेशनर भी बन सकते हैं वजह
घर की सफाई में इस्तेमाल होने वाले कुछ क्लीनिंग प्रोडक्ट, पेंट, स्प्रे, परफ्यूम और एयर फ्रेशनर हवा में VOCs (Volatile Organic Compounds) छोड़ सकते हैं। कुछ VOCs की मात्रा घर के अंदर बाहर की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।
इसलिए ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखना जरूरी है। सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग केमिकल को आपस में मिलाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे हानिकारक गैसें बन सकती हैं।
धूल, फफूंद और नमी को न करें नजरअंदाज
घर की धूल में परागकण, मोल्ड स्पोर्स, धूल के कण और पालतू जानवरों से जुड़े एलर्जेंस मौजूद हो सकते हैं। वहीं दीवारों, छत या फर्नीचर में लगातार नमी रहने से फफूंद (Mold) बढ़ सकती है। इससे आंख, नाक और गले में जलन के साथ सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
खराब Indoor Air Quality के कारण आंख, नाक और गले में जलन, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी परेशानियां हो सकती हैं। महीन कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ लोगों में सांस तथा हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
घर की हवा साफ रखने के आसान उपाय
- खाना बनाते समय चिमनी या एग्जॉस्ट फैन चलाएं।
- घर में धूम्रपान न करें।
- जरूरत के अनुसार खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन रखें।
- धूल और फफूंद को नियमित रूप से साफ करें।
- नमी और पानी के रिसाव को तुरंत ठीक कराएं।
- केमिकल क्लीनर और एयर फ्रेशनर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें।
- एयर कंडीशनर और एयर प्यूरीफायर के फिल्टर को निर्माता के निर्देश के अनुसार साफ या बदलें।
याद रखें, सिर्फ बाहर की हवा ही नहीं, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। प्रदूषण के स्रोत को कम करना, पर्याप्त वेंटिलेशन और जरूरत पड़ने पर फिल्ट्रेशन—इन तीनों तरीकों से Indoor Air Quality को बेहतर किया जा सकता है।
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