समुद्र के पानी से निकलेगा यूरेनियम? IISc बेंगलुरु ने खोजा नया तरीका, जानें कैसे काम करती है खास झिल्ली


 परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है। धरती पर यूरेनियम के भंडार सीमित हैं, लेकिन वैज्ञानिकों की नजर लंबे समय से समुद्र में मौजूद यूरेनियम पर रही है। समस्या यह है कि समुद्री पानी में यूरेनियम की मात्रा बेहद कम होती है और इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे कई दूसरे आयन बड़ी मात्रा में मौजूद रहते हैं। ऐसे में समुद्री पानी से केवल यूरेनियम को अलग करना काफी चुनौतीपूर्ण है।

अब भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने इस दिशा में एक नई तकनीक विकसित करने की संभावना दिखाई है। शोध में ऐसी विशेष झिल्ली का अध्ययन किया गया है, जो यूरेनियम के यूरानिल आयन (UO₂²⁺) को प्रभावी ढंग से रोक सकती है, जबकि पानी और कुछ अन्य आयनों को इसके आर-पार जाने देती है।

कैसे काम करती है IISc की यह खास झिल्ली?

IISc के शोधकर्ताओं ने Covalent Organic Framework (COF) से बनी झिल्लियों का इस्तेमाल किया है। ये बेहद छोटे छिद्रों वाली संरचनाएं होती हैं, जिनकी परतों की विशेष व्यवस्था आयनों की आवाजाही को नियंत्रित कर सकती है।

शोध में खास तौर पर slipped TpPa-1 और TpPa-F4 COF membranes ने यूरानिल आयनों को पूरी तरह रोकने की क्षमता दिखाई। वहीं पानी और कुछ एक-वैलेन्ट आयनों को गुजरने की अनुमति मिली।

आकार और ऊर्जा बाधा से होता है चयन

इस तकनीक की खासियत केवल रासायनिक आकर्षण नहीं है। झिल्ली की नैनोस्केल संरचना आयनों की गति के लिए एक तरह की ऊर्जा बाधा पैदा करती है। शोध के मुताबिक, TpPa-1 और TpPa-F4 की संरचना यूरानिल आयनों के लिए करीब 3.6 kcal/mol की ऊर्जा बाधा पैदा करती है, जिससे वे झिल्ली के आर-पार नहीं जा पाते। दूसरी ओर पानी और कुछ छोटे आयनों का परिवहन जारी रहता है।

समुद्र में कितना यूरेनियम है?

समुद्री पानी में यूरेनियम की मात्रा बहुत कम होने के बावजूद महासागरों में इसकी कुल मात्रा बेहद बड़ी मानी जाती है। एक अनुमान के मुताबिक समुद्र में करीब 4.5 अरब टन यूरेनियम संसाधन मौजूद हैं, जो जमीन पर मौजूद संसाधनों से लगभग 1,000 गुना अधिक हो सकते हैं। हालांकि, कम सांद्रता और दूसरे आयनों की मौजूदगी के कारण इसे आर्थिक रूप से निकालना अभी बड़ी चुनौती है।

क्या जल्द समुद्र से यूरेनियम निकाला जाएगा?

IISc का यह शोध फिलहाल एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बड़े पैमाने पर समुद्री पानी से यूरेनियम निकालना तुरंत शुरू हो जाएगा। प्रयोगशाला स्तर की सफलता को औद्योगिक स्तर तक ले जाने के लिए लागत, झिल्ली की टिकाऊ क्षमता, बड़े पैमाने पर पानी की प्रोसेसिंग और ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियों का समाधान करना होगा।

फिर भी, यह तकनीक भविष्य में समुद्र को यूरेनियम के संभावित स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण रास्ता खोल सकती है

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