BRICS में भारत की बढ़ती ताकत: इथियोपिया, मलेशिया और वियतनाम से मजबूत होंगे रणनीतिक रिश्ते


 ब्रिक्स के मंच पर भारत की बढ़ती सक्रियता के बीच इथियोपिया, मलेशिया और वियतनाम के साथ उसके संबंधों को लेकर नई संभावनाएं सामने आई हैं। वैश्विक दक्षिण में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और कई देश उसे आर्थिक विकास, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहे हैं। इन देशों के साथ बढ़ता संपर्क भारत की विदेश नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इथियोपिया और मलेशिया की ओर से भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा यह संकेत देती है कि नई दिल्ली वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी जगह बना रही है। वहीं, वियतनाम के साथ भारत के रिश्ते भी लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। ऐसे में इन तीनों देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देना भारत के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अहम साबित हो सकता है।

इथियोपिया के साथ सहयोग की संभावनाएं

अफ्रीका में भारत की बढ़ती मौजूदगी के बीच इथियोपिया एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित रखने के बजाय विकास और तकनीकी सहयोग के जरिए भी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

मलेशिया के साथ रिश्तों को नई गति

दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अलावा डिजिटल तकनीक, शिक्षा, रक्षा और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं मौजूद हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच मलेशिया के साथ मजबूत संबंध भारत की क्षेत्रीय भूमिका को और प्रभावी बना सकते हैं।

वियतनाम क्यों अहम?

वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ा है। दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के बीच भारत और वियतनाम का रणनीतिक सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

वैश्विक दक्षिण में बढ़ती भारत की भूमिका

इथियोपिया, मलेशिया और वियतनाम के साथ बढ़ते संबंधों से साफ है कि भारत अपनी विदेश नीति में वैश्विक दक्षिण को महत्वपूर्ण प्राथमिकता दे रहा है। भारत की कोशिश है कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर मजबूती मिले और आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खुलें।

ब्रिक्स के विस्तार और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के सामने अपनी स्वतंत्र रणनीतिक पहचान बनाए रखने की चुनौती भी है। ऐसे में इन देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत को वैश्विक दक्षिण के एक भरोसेमंद और प्रभावशाली रणनीतिक साझेदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद कर सकती है।

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