भारत-चीन संबंधों में आई नरमी, लेकिन सीमा विवाद पर अभी लंबा रास्ता बाकी


 भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय में रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कई अहम कदम दिखाई दिए हैं। 2026 में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत, कूटनीतिक संपर्क और लोगों के बीच आवाजाही बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। हालांकि, इन घटनाक्रमों को सीमा विवाद के स्थायी समाधान के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। मौजूदा स्थिति को रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन आगे की राह अभी कई चुनौतियों से भरी है।

अगस्त 2026 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी वांग यी के बीच सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा सीमा विवाद के समाधान के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही।

इसके बाद सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने सीमा क्षेत्रों में शांति को रिश्तों के विकास की महत्वपूर्ण बुनियाद बताया और मौजूदा समझौतों व व्यवस्थाओं के पालन की जरूरत रेखांकित की। दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न के उचित समाधान की दिशा में बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

रिश्तों में सुधार के संकेत केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं हैं। भारत और चीन के बीच लोगों के बीच संपर्क, व्यापार, कारोबारी रिश्तों और सीधी उड़ानों जैसे क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश हो रही है। चीनी पक्ष ने भी द्विपक्षीय संबंधों में संस्थागत संवाद और सहयोग बढ़ने की बात कही है।

फिर भी सबसे अहम सवाल सीमा विवाद का है। दोनों देशों के बीच सीमा का अंतिम निर्धारण अब तक नहीं हुआ है और अगस्त की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भी किसी अंतिम सीमा समझौते की घोषणा नहीं हुई। इसके बजाय बातचीत को आगे बढ़ाने और सीमा समाधान के लिए ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया।

इसलिए 2026 के घटनाक्रमों को भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने और संवाद बहाल करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव कहा जा सकता है। लेकिन क्या चीन की रणनीतिक सोच में स्थायी बदलाव आया है और क्या दोनों देश सीमा विवाद का समाधान निकाल पाएंगे, इसका जवाब आने वाले समय में होने वाली बातचीत और जमीन पर स्थिति से ही स्पष्ट होगा।

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