मेंटल हेल्थ: एंग्जाइटी तो सुना है, लेकिन क्या है ‘रिंगजाइटी’? जानें क्यों बिना फोन बजे महसूस होती है घंटी


 आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया नोटिफिकेशन की लगातार आदत के बीच कई लोगों को एक अजीब अनुभव होता है। उन्हें लगता है कि फोन बज रहा है या वाइब्रेट हो रहा है, लेकिन जब वे फोन देखते हैं तो वहां कोई कॉल या नोटिफिकेशन नहीं होता। इस स्थिति को आम तौर पर ‘रिंगजाइटी’ (Ringxiety) कहा जाता है। वैज्ञानिक साहित्य में इसे Phantom Phone Signals या Phantom Ringing/Vibration भी कहा जाता है।

क्या होती है रिंगजाइटी?

रिंगजाइटी कोई अलग मानसिक बीमारी या आधिकारिक मानसिक विकार नहीं है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बिना किसी वास्तविक फोन कॉल या नोटिफिकेशन के घंटी, वाइब्रेशन या अलर्ट महसूस होता है।

कभी-कभार ऐसा होना काफी आम है और ज्यादातर मामलों में यह परेशान करने वाली समस्या नहीं होती। शोध में पाया गया है कि इस तरह के अनुभव अलग-अलग आबादी में काफी सामान्य हैं।

क्यों महसूस होती है फोन की झूठी घंटी?

रिंगजाइटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। फोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल और लगातार नोटिफिकेशन का इंतजार दिमाग को फोन से जुड़े संकेतों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है।

अगर कोई व्यक्ति किसी खास कॉल या मैसेज का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, तो उसका ध्यान बार-बार फोन की तरफ जा सकता है। ऐसे में सामान्य आवाज या शरीर में होने वाली हल्की संवेदना भी फोन के वाइब्रेशन जैसी महसूस हो सकती है। कुछ शोधों में फोन पर निर्भरता और ऐसे phantom phone experiences के बीच संबंध पाया गया है।

चिंता और तनाव भी बढ़ा सकते हैं समस्या

रिंगजाइटी का संबंध केवल मोबाइल इस्तेमाल से नहीं है। किसी महत्वपूर्ण कॉल की प्रतीक्षा या किसी व्यक्ति से संपर्क को लेकर चिंता भी ऐसे अनुभवों की संभावना बढ़ा सकती है। एक अध्ययन में attachment anxiety और phantom ringing/notification experiences के बीच संबंध पाया गया था।

बार-बार हो तो क्या करें?

अगर कभी-कभार फोन की घंटी या वाइब्रेशन महसूस हो जाए, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर ऐसा बार-बार होने लगे और इसके कारण आप लगातार फोन चेक करने लगें, तनाव महसूस करें या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो अपने मोबाइल इस्तेमाल की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

फोन की अनावश्यक notifications बंद करना, स्क्रीन टाइम कम करना और कुछ समय के लिए फोन से दूरी बनाना मददगार हो सकता है। हालिया शोध भी बताता है कि जहां ये अनुभव परेशान करने वाले हों, वहां फोन इस्तेमाल से जुड़े व्यवहार में बदलाव उपयोगी हो सकते हैं।

रिंगजाइटी को समझना क्यों जरूरी है?

रिंगजाइटी अपने आप में कोई गंभीर बीमारी नहीं मानी जाती, लेकिन यह इस बात का संकेत हो सकती है कि हमारा दिमाग मोबाइल से मिलने वाले संकेतों के प्रति कितना संवेदनशील हो गया है। इसलिए तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन उसके साथ स्वस्थ डिजिटल आदतें बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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